दिल्ली में मुफ्त बस सफर के लिए अब 'पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड' जरूरी, पेपर टिकट हुए बंद

दिल्ली की महिलाओं, लड़कियों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अब बसों में मुफ्त सफर करने का तरीका बदल गया है। दिल्ली सरकार ने पेपर आधारित पिंक टिकट सिस्टम को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। अब डीटीसी (DTC) और क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा का लाभ उठाने के लिए पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड का होना अनिवार्य कर दिया गया है। 4 अक्टूबर 2026 से लागू हुए इस नए नियम के बाद से यात्रियों के बीच काफी असमंजस की स्थिति देखी जा रही है।
6 अक्टूबर तक कई यात्रियों ने कार्ड केंद्रों पर भीड़, स्कैनिंग प्रक्रिया और नए नियमों को लेकर अपनी मुश्किलें साझा की हैं। इस बीच, दिल्ली के परिवहन मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने 5 अक्टूबर को स्थिति स्पष्ट करते हुए लोगों से घबराने की अपील की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जब तक सभी पात्र निवासियों को कार्ड नहीं मिल जाते, तब तक इनके वितरण की प्रक्रिया जारी रहेगी। अब तक करीब 19 लाख कार्ड बांटे जा चुके हैं, जो 5 वर्ष या उससे अधिक आयु के दिल्ली के स्थायी निवासियों के लिए जारी किए गए हैं।
कार्ड कैसे मिलेगा और क्या हैं नियम?
इस नई व्यवस्था को 'दिल्ली परिवहन निगम (निःशुल्क और रियायती पास) (द्वितीय संशोधन) विनियम, 2026' के तहत लागू किया गया है। कार्ड प्राप्त करने के लिए आधार ऑथेंटिकेशन और मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन जरूरी है।
- शुल्क: पहला कार्ड पूरी तरह मुफ्त दिया जाएगा, लेकिन कार्ड खोने या खराब होने पर ₹49 से ₹59 (GST सहित) का शुल्क देना होगा।
- वैधता: यह स्मार्ट कार्ड 5 साल तक वैध रहेगा।
- कहाँ से लें: कार्ड ऑफलाइन अधिकृत NCMC वितरण केंद्रों से या ऑनलाइन 'Mufin Pay' पोर्टल के जरिए प्राप्त किए जा सकते हैं।
- मेट्रो और RRTS: यह कार्ड नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) की तरह काम करेगा, जिससे दिल्ली मेट्रो और RRTS में भी सफर किया जा सकेगा, हालांकि वहां निर्धारित किराया देना होगा।
सरकार ने दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त इंतजाम किए हैं। अब एक ही यात्रा के दौरान कई मुफ्त टिकट जारी नहीं किए जा सकेंगे और हर टिकट पर यात्री का नाम और यात्रा का विवरण दर्ज होगा। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि NCR के शहरों जैसे नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम के निवासी इस मुफ्त सुविधा के दायरे से बाहर हैं और उन्हें दिल्ली की बसों में सफर के लिए टिकट खरीदना होगा।