पिंक सहेली कार्ड: दिल्ली में महिलाओं के मुफ्त सफर की शुरुआत अव्यवस्था और विवादों के बीच

दिल्ली की महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए मुफ्त बस यात्रा को आसान बनाने के लिए शुरू किया गया पिंक सहेली कार्ड दिल्ली का कार्यान्वयन फिलहाल विवादों में घिर गया है। जहां एक तरफ सरकार इसे एक बड़ी सुविधा के तौर पर पेश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ रजिस्ट्रेशन केंद्रों पर फैली अव्यवस्था और अधिकारियों द्वारा महिलाओं के साथ कथित बदसलूकी की खबरों ने इस योजना की चमक फीकी कर दी है।
प्रशासनिक खामियों और यात्रियों को हो रही भारी असुविधा को देखते हुए दिल्ली परिवहन निगम (DTC) ने एक राहत भरा कदम उठाया है। अब पेपर-आधारित 'पिंक टिकट' की वैधता को 10 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है। हालांकि, इस आदेश के बावजूद कई बसों में कंडक्टर अभी भी पेपर टिकट देने से इनकार कर रहे हैं, जिससे सफर करने वाली महिलाओं के बीच भारी भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
कार्ड की पात्रता और आवेदन प्रक्रिया
पिंक सहेली कार्ड दरअसल एक नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) है, जो 5 वर्ष या उससे अधिक आयु की दिल्ली की महिला और ट्रांसजेंडर निवासियों के लिए उपलब्ध है। इस कार्ड को पाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की गई हैं:
- आवेदक के पास भौतिक आधार कार्ड होना अनिवार्य है।
- आधार से लिंक मोबाइल नंबर होना चाहिए ताकि स्थायी निवासी होने की पुष्टि की जा सके।
- यह सुविधा केवल दिल्ली के निवासियों के लिए है, बाहरी राज्यों के लोग इसके पात्र नहीं होंगे।
यह कार्ड दिल्ली के 50 निर्धारित केंद्रों, जिनमें DTC कार्यालय और DM/SDM कार्यालय शामिल हैं, से मुफ्त प्राप्त किया जा सकता है। इसके अलावा, इच्छुक लोग MufinPay के जरिए ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं। ध्यान रहे कि यदि कार्ड खो जाता है, तो नया कार्ड बनवाने के लिए 59 रुपये का शुल्क देना होगा।
आंकड़ों की बात करें तो अक्टूबर 2026 की शुरुआत तक 19 लाख से अधिक कार्ड जारी किए जा चुके हैं। कार्ड के उपयोग में भारी उछाल देखा गया है, जहां रोजाना इस्तेमाल करने वालों की संख्या 28,000 से बढ़कर महज चार दिनों में 3 लाख से अधिक हो गई है। यह कार्ड पांच साल के लिए वैध है और DTC व क्लस्टर बसों में 'टैप-एंड-गो' सुविधा देता है। साथ ही, इसे दिल्ली मेट्रो और RRTS के साथ भी जोड़ा गया है, हालांकि वहां मानक किराया लागू रहेगा।
फिलहाल, दिल्ली सरकार इस स्मार्ट कार्ड जनादेश और निवास संबंधी नियमों को अंतिम रूप देने के लिए उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू से गजट नोटिफिकेशन की औपचारिक मंजूरी का इंतजार कर रही है। तब तक, शेष लोगों को जागरूक करने के लिए 10 दिनों का एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है।