दिल्ली में पीजी के लिए बदलेंगे नियम: सरकार बनाएगी नई गाइडलाइन, अब सुरक्षा होगी अनिवार्य

सत्य निकेतन में हुए उस दर्दनाक हादसे ने सबको झकझोर कर रख दिया था, जिसमें पांच दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों समेत सात लोगों की जान चली गई। इस घटना के बाद दिल्ली सरकार अब एक्शन मोड में है और शहर में Paying Guest (PG) आवासों की व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की तैयारी कर रही है। मकसद साफ है—छात्रों और युवाओं के लिए सुरक्षित और किफायती आवास सुनिश्चित करना।
इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए शिक्षा मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने अपनी दूसरी बैठक की। इस बैठक में एक सब-कमिटी का गठन किया गया है, जिसमें दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), एमसीडी (MCD), दिल्ली सरकार और दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति कार्यालय के अधिकारी शामिल होंगे। यह सब-कमिटी मास्टर प्लान 2047 और एमसीडी एक्ट 1957 के तहत उन छूटों की जांच करेगी, जिससे शैक्षणिक केंद्रों के 5-6 किलोमीटर के दायरे में आने वाली हाउसिंग सोसायटियों और आरडब्ल्यूए क्षेत्रों में पीजी संचालन को व्यवस्थित किया जा सके।
लाइसेंस और सुरक्षा जांच के बिना नहीं चलेंगे पीजी
सरकार जल्द ही 'पेइंग गेस्ट आवास विनियमन और सुरक्षा विधेयक, 2026' का मसौदा तैयार करने जा रही है। नए नियमों के तहत अब पीजी संचालकों के लिए कुछ शर्तें अनिवार्य होंगी:
- अनिवार्य दस्तावेज: सभी पीजी ऑपरेटरों को नगर निगम का लाइसेंस, पुलिस क्लीयरेंस और स्ट्रक्चरल व फायर सेफ्टी एनओसी (NOC) लेना होगा। इसके लिए 90 दिन का समय दिया जाएगा।
- डिजिटल ट्रैकिंग: हर पीजी को एक यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलेगा और सारा डेटा एक सेंट्रलाइज्ड वेब पोर्टल पर ट्रैक किया जाएगा।
- निरीक्षण: शुरुआती कदम के तौर पर एमसीडी और डीडीए की टीमें अगले तीन दिनों में चिन्हित 100 संपत्तियों की सुरक्षा जांच करेंगी।
- सख्त सुरक्षा मानक: सीसीटीवी कैमरों में 40-45 दिनों का बैकअप रखना होगा। पुरानी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाएगा।
- वार्डन और गार्ड: एक समर्पित वार्डन सिस्टम होगा, जिसे 15 मिनट के भीतर पहुंचने में सक्षम होना चाहिए। 15 से अधिक छात्रों वाले पीजी में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाइसेंस प्राप्त गार्ड की तैनाती अनिवार्य होगी।
- विजिटर नियम: बाहरी लोगों का आना सुबह 8 बजे से रात 9 बजे तक सीमित रहेगा और उनका रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।
इतना ही नहीं, सरकार अब किराए की मनमानी रोकने के लिए एक 'रेंट रेगुलेशन कमेटी' बनाने पर भी विचार कर रही है, जो अलग-अलग क्षेत्रों के लिए किराए की एक मानक सीमा (Rent Band) तय करेगी। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने भरोसा दिलाया है कि सरकार सभी हितधारकों से सलाह मशविरा कर रही है ताकि छात्रों को सुरक्षित और सस्ता घर मिल सके।