दिल्ली में बढ़ा पर्सनलाइज्ड स्किन केयर का क्रेज, अब एक्सपर्ट्स की सलाह पर मिल रहा इलाज

दिल्ली की स्किन केयर मार्केट में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब लोग बाजार में मिलने वाले आम ब्यूटी प्रोडक्ट्स या एक जैसे स्किन केयर रूटीन के बजाय अपनी त्वचा की जरूरतों के हिसाब से 'पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट' को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। दिल्ली के लोग अब मुहांसों, पिगमेंटेशन, स्किन टेक्सचर और बढ़ती उम्र के निशानों जैसी समस्याओं के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह और कस्टमाइज्ड केयर प्लान चुन रहे हैं।
आजकल लोग अपनी लाइफस्टाइल और स्किन टाइप के आधार पर इलाज चाहते हैं। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए लेजर ट्रीटमेंट, केमिकल पील्स और माइक्रोनीडलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ गया है। इस बदलाव के बीच 'डर्मलॉजी केयर' जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स लोकप्रिय हो रहे हैं, जो 150 से ज्यादा ब्रांड्स के बीच से डॉक्टरों की सलाह पर सही प्रोडक्ट चुनने में मदद कर रहे हैं। वहीं, 'डर्माप्योरिटीज' जैसे ब्रांड्स US-FDA अप्रूव्ड तकनीक के जरिए डर्मेटोलॉजी और एस्थेटिक्स को जोड़कर अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं।
सुरक्षा के लिए CDSCO ने कड़े किए नियम
स्किन केयर और एस्थेटिक सेवाओं में बढ़ती मांग के साथ अब सरकार ने सुरक्षा मानकों को भी सख्त कर दिया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने मई और जून 2026 में नई गाइडलाइन्स जारी की हैं। इन नियमों का मकसद मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और अनैतिक प्रथाओं को रोकना है।
CDSCO के 19 मई 2026 के निर्देश के मुताबिक, अब इंजेक्शन वाले प्रोडक्ट्स को 'कॉस्मेटिक' नहीं माना जाएगा। साथ ही, यह साफ कर दिया गया है कि कोई भी थेरेप्यूटिक दावा केवल उन्हीं प्रोडक्ट्स के लिए किया जा सकता है जिन्हें 'ड्रग' के रूप में मंजूरी मिली हो। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब सभी इनवेसिव प्रोसीजर्स (त्वचा के अंदर किए जाने वाले उपचार) केवल क्वालिफाइड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स द्वारा ही किए जा सकेंगे। इससे ब्यूटी पार्लरों और वेलनेस सेंटर्स की सीमाएं तय हो गई हैं, ताकि लोग केवल विशेषज्ञों की देखरेख में ही इलाज कराएं।