आस्था कुंज कांड के बाद दिल्ली के पार्कों में सुरक्षा ऑडिट, 190 पार्क 'हाई रिस्क' श्रेणी में

दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में एक 17 साल की किशोरी के साथ हुए गैंगरेप की दर्दनाक घटना ने राजधानी की सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। इस घटना के बाद अब प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है और पूरे शहर के पार्कों का सुरक्षा ऑडिट कराया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
यह मामला 21 सितंबर 2026 का है, जब तीन आरोपियों—आसिफ, हेमंत और मुकेश ने पुलिसकर्मी बनकर वारदात को अंजाम दिया। दिल्ली की एक अदालत ने इन तीनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस घटना ने पार्क की उन खामियों को उजागर किया, जिनके बारे में स्थानीय निवासी और लेडी श्री राम कॉलेज की छात्राएं लंबे समय से शिकायत कर रही थीं। पार्क में रोशनी की कमी, सीसीटीवी कैमरों का न होना और खुले एंट्री पॉइंट्स अपराधियों के लिए आसान रास्ता बन गए थे।
सुरक्षा बढ़ाने के लिए DDA और MCD का मास्टर प्लान
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और चार हफ्ते के भीतर दिल्ली के सार्वजनिक स्थानों के ऑडिट का आदेश दिया। वहीं, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने पिंक पुलिस की तैनाती और गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी 736 पार्कों का आकलन किया है, जिसमें 190 पार्कों को 'हाई रिस्क' यानी उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। सुरक्षा पुख्ता करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
- CCTV और लाइटिंग: 323 और पार्कों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और 520 पार्कों में अतिरिक्त लाइटिंग की व्यवस्था होगी।
- गेट लॉक सिस्टम: 163 पार्कों के गेटों को लॉक करने वाले मॉडल में बदला जाएगा ताकि अनधिकृत प्रवेश रोका जा सके।
- निगरानी: 602 पार्कों में गार्डों के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू की गई है और हाई-रिस्क जोन में बाइक पेट्रोलिंग शुरू की गई है।
दूसरी ओर, दिल्ली नगर निगम (MCD) ने भी 200 पार्कों को प्राथमिकता पर रखा है, जहां दिसंबर के अंत तक सुरक्षा इंतजाम पूरे कर लिए जाएंगे। दिल्ली पुलिस फिलहाल डीएनए सैंपल्स और फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है, जबकि पार्कों में इमरजेंसी कॉन्टैक्ट बोर्ड लगाए जा रहे हैं ताकि किसी भी संकट के समय तुरंत मदद मिल सके।