दिल्ली में बढ़ा पैरानॉर्मल टूरिज्म का क्रेज, अब साल भर महसूस करेंगे 'खौफ'
दिल्ली में अब सिर्फ हैलोवीन ही नहीं, बल्कि साल भर हॉरर टूरिज्म और पैरानॉर्मल एक्टिविटीज का क्रेज बढ़ रहा है। जानें क्या है पूरा मामला।

राजधानी दिल्ली में अब डर सिर्फ हैलोवीन तक सीमित नहीं रह गया है। शहर के लोगों के बीच पैरानॉर्मल एक्टिविटीज और हॉरर थीम वाले मनोरंजन का क्रेज इस कदर बढ़ा है कि यह अब एक साल भर चलने वाले कल्चरल ट्रेंड में बदल चुका है। लोग अब ऐतिहासिक स्मारकों की खूबसूरती के साथ-साथ वहां छिपी डरावनी कहानियों और रूहानी ताकतों को महसूस करने के लिए उत्सुक दिख रहे हैं।
इस बढ़ते रुझान का सबसे बड़ा उदाहरण ओखला के एनएसआईसी (NSIC) ग्राउंड्स में आयोजित 'हॉररकॉन इंडिया 2026' (HorrorCon India 2026) है। टीएमवी के रमन भल्ला और 'खूनी मंडे' के दिव्य अग्रवाल द्वारा आयोजित यह दो दिवसीय फेस्टिवल 31 अक्टूबर और 1 नवंबर को मनाया गया। इस इवेंट में हॉन्टेड हाउस, गेमिंग, लाइव परफॉर्मेंस और हॉरर फिल्मों की स्क्रीनिंग जैसे आकर्षण थे, जिसने दिल्लीवासियों को एक अलग ही दुनिया का अनुभव कराया।
ऐतिहासिक किलों में 'जिन्नों' की तलाश और नाइट टूरिज्म
सिर्फ इवेंट्स ही नहीं, बल्कि दिल्ली के पुराने स्मारकों में 'हॉन्टेड वॉक' का चलन भी तेजी से बढ़ा है। 'एनरूट इंडियन हिस्ट्री' और 'अनज़िप दिल्ली' जैसे संगठन लोगों को शहर के उन हिस्सों में ले जा रहे हैं, जो अपनी डरावनी कहानियों के लिए मशहूर हैं। एनरूट इंडियन हिस्ट्री की क्यूरेटर अनुष्का जैन बताती हैं कि सामान्य हेरिटेज टूर के मुकाबले इन हॉन्टेड वॉक में लोगों की भीड़ ज्यादा होती है। जमाली-कमाली और फिरोज शाह कोटला किला जैसे स्थान, जो जिन्नों की कहानियों के लिए जाने जाते हैं, वहां लोग अक्सर अजीब और डरावने अनुभवों का दावा करते हैं।
वहीं, अनज़िप दिल्ली के संस्थापक और मानवविज्ञानी मोहम्मद अनस 2021 से स्थानीय लोककथाओं और ऐतिहासिक किंवदंतियों को तलाशने के लिए ऐसी वॉक आयोजित कर रहे हैं। हालांकि, इस बढ़ते क्रेज के बीच कुछ चुनौतियां भी हैं। दिल्ली पुरातत्व विभाग ने मालचा महल और भुली बटियारी का महल जैसे स्थानों पर पहुंच स्थायी रूप से बंद कर दी है, जबकि अन्य साइट्स शाम 7 बजे बंद हो जाती हैं।
बढ़ती मांग को देखते हुए दिल्ली टूरिज्म ने मार्च 2026 में फिरोज शाह कोटला में 'हॉन्टेड हेरिटेज वॉक' की शुरुआत की है। सरकारी मान्यता प्राप्त ये टूर 25 या उससे अधिक लोगों के समूह के लिए उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत 500 रुपये प्रति व्यक्ति है और ये रात 8:30 बजे तक चलते हैं।
हालांकि, सभी विशेषज्ञ इस ट्रेंड से खुश नहीं हैं। हेरिटेज वॉक क्यूरेटर शाह उमैर का मानना है कि अलौकिक कहानियों पर ज्यादा जोर देने से स्मारकों का वास्तविक ऐतिहासिक महत्व कम हो सकता है। उनका तर्क है कि 1980 के दशक में जमाली-कमाली जैसी जगहों पर भूतों की अफवाहें शायद इसलिए फैलाई गई थीं ताकि सुनसान खंडहरों में अवैध गतिविधियां न हों।
फिल्मों के शौकीनों के लिए भी दिल्ली में डरावना माहौल तैयार किया जा रहा है। 'खतरनाक फिल्म्स' की तारा ने इस साल 23 हॉरर स्क्रीनिंग आयोजित की हैं, जिसमें वसंत कुंज के सोशल में 'भूतफ्लिक्स नाइट' जैसे इवेंट्स शामिल रहे। इसके अलावा, दिल्ली लोकल गाइड्स जैसे समूह महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क में फोटोग्राफी और शहर की रहस्यमयी कहानियों पर चर्चा करते नजर आते हैं।