दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत कॉरिडोर का रास्ता साफ, अब रफ्तार पकड़ेगा निर्माण कार्य

दिल्ली से करनाल का सफर अब 90 मिनट में होगा पूरा। NCRTC और टाटा पावर के बीच MoU के बाद नमो भारत कॉरिडोर का निर्माण कार्य शुरू होगा।

Kittu Kumari30 October 20262 min read0 viewsNCR
दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत कॉरिडोर का रास्ता साफ, अब रफ्तार पकड़ेगा निर्माण कार्य

दिल्ली से हरियाणा के पानीपत और करनाल जाने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। दिल्ली पानीपत करनाल नमो भारत कॉरिडोर के निर्माण की राह में आने वाली सबसे बड़ी बाधा अब दूर हो गई है। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) और टाटा पावर-DDL के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) हुआ है, जिसके बाद अब इस प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य में तेजी आएगी।

इस प्रोजेक्ट के लिए सबसे बड़ी चुनौती बिजली की हाई-वोल्टेज लाइनों को शिफ्ट करना था। समझौते के तहत 765, 400, 132 और 66 kV की कुल 38 एक्स्ट्रा-हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों को स्थानांतरित किया जाएगा। इस काम में BSES, UHBVNL, HVPNL और पावर ग्रिड जैसी एजेंसियां भी शामिल हैं। लक्ष्य यह है कि काम शुरू होने के एक साल के भीतर इस पूरी शिफ्टिंग प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाए।

सफर होगा आसान: 90 मिनट में दिल्ली से करनाल

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करीब 136.3 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर न केवल दूरी घटाएगा बल्कि समय की भी भारी बचत करेगा। एक बार यह सेवा शुरू होने के बाद, दिल्ली से करनाल की यात्रा मात्र 90 मिनट में पूरी हो जाएगी, जबकि पानीपत पहुंचने में केवल 45 से 50 मिनट का समय लगेगा। यह पूरा प्रोजेक्ट करीब 33,051 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगा, जिसमें हरियाणा सरकार लगभग 7,472 करोड़ रुपये का योगदान दे रही है।

इस कॉरिडोर की कुछ खास बातें इस प्रकार हैं:

  • रूट: यह कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर नरेला, कुंडली, सोनीपत और गन्नौर होते हुए पानीपत और करनाल तक जाएगा।
  • स्टेशन: पूरे रूट पर 21 स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें समालखा, सीवाह बस स्टैंड और पानीपत सिटी जैसे मुख्य केंद्र शामिल होंगे।
  • डिजाइन: कुल ट्रैक में से 124.82 किलोमीटर एलिवेटेड (ऊपर) होगा और 11.48 किलोमीटर अंडरग्राउंड (जमीन के नीचे) बनाया जाएगा।
  • कनेक्टिविटी: यह सिस्टम पूरी तरह से इंटरऑपरेबल होगा, जिसका मतलब है कि यात्री सराय काले खां के जरिए दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ और दिल्ली-गुरुग्राम-SNB लाइनों पर आसानी से स्विच कर सकेंगे।

प्रोजेक्ट की निगरानी केंद्र सरकार के PMG पोर्टल के जरिए की जा रही है। जियोटेक्निकल जांच का काम पूरा हो चुका है और हरियाणा सरकार जमीन की सीधी खरीद कर रही है ताकि काम में कोई देरी न हो। अधिकारियों का लक्ष्य है कि साल 2031 तक इस आधुनिक रेल सेवा को आम जनता के लिए शुरू कर दिया जाए।

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