प्रदूषण से जंग: दिल्ली में 104 करोड़ की लागत से लगेंगे आउटडोर एयर प्यूरीफायर, 40 जगहों पर होगा ट्रायल
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए 104 करोड़ का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। जानें किन इलाकों में लगेंगे आउटडोर एयर प्यूरीफायर।

सर्दियों में जहरीली धुंध और दमघोंटू हवा से जूझने वाली दिल्ली में अब एक नया प्रयोग किया जा रहा है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने शहर की हवा को साफ करने के लिए 104 करोड़ रुपये का एक पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत शहर के 40 प्रमुख स्थानों पर आउटडोर एयर प्यूरीफायर लगाए जाएंगे, ताकि यह देखा जा सके कि क्या निजी क्षेत्र की तकनीक वास्तव में हवा में मौजूद हानिकारक कणों (Particulate Matter) को 20 प्रतिशत तक कम कर सकती है।
इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि यह 'परफॉर्मेंस बेस्ड कॉन्ट्रैक्टिंग' मॉडल पर आधारित है। यानी कंपनियों को भुगतान तभी किया जाएगा जब उनकी तकनीक हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने में सफल होगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 27 अक्टूबर 2026 को शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 160 से 175 के बीच था, जबकि रोहिणी और जहांगीरपुरी जैसे इलाकों में यह 260 तक पहुंच गया था। इसी संकट को देखते हुए सरकार ने 17 सितंबर को GeM पोर्टल के जरिए टेंडर जारी किए थे।
इन इलाकों में दिखेगा असर और क्या हैं शर्तें?
इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 40 साइट्स चुनी गई हैं, जिनमें से 29 साइट्स (करीब 72.5%) व्यावसायिक और बाजार वाले इलाके हैं। सबसे ज्यादा ध्यान दक्षिण और मध्य दिल्ली पर दिया गया है, जहां 19 लोकेशन तय की गई हैं। इनमें कनॉट प्लेस, खान मार्केट और लोटस टेम्पल कॉरिडोर जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके शामिल हैं। वहीं, ट्रांस यमुना और पूर्वी दिल्ली में 5 साइट्स होंगी, हालांकि बवाना और नरेला जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को इस शुरुआती चरण से बाहर रखा गया है।
तकनीकी शर्तों की बात करें तो, चुनी गई मशीनों को सरकारी लैब से प्रमाणित होना होगा और उन्हें PM2.5 व PM10 के स्तर में 20% की कमी लानी होगी। साथ ही, ये मशीनें शोर या ओजोन जैसी कोई नई समस्या पैदा नहीं करनी चाहिए। एक कंपनी अधिकतम 10 साइट्स ही संभाल सकती है, और हर साइट के लिए करीब 2.6 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने इस प्रयोग पर सवाल भी उठाए हैं। उनका मानना है कि खुले वातावरण में हवा का बहाव इतना अधिक होता है कि मशीनों के जरिए प्रदूषण को पूरी तरह खत्म करना भौतिक विज्ञान (Physics) के नजरिए से चुनौतीपूर्ण है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि एक साल चलने वाला यह ट्रायल दिल्ली की हवा में कोई वास्तविक बदलाव ला पाता है या नहीं। फिलहाल, इस पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी DPCC और एक स्वतंत्र समिति करेगी।