दिल्ली में नॉन BS6 वाहनों की एंट्री बैन, अब बिना PUC नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

राजधानी दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाए हैं। 1 नवंबर 2026 से शहर में प्रदूषण नियंत्रण के कड़े इंतजाम लागू किए जाएंगे। इस नई व्यवस्था के तहत अब बाहर से आने वाले वो वाहन दिल्ली में प्रवेश नहीं कर पाएंगे जो BS6 उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते हैं। इसके साथ ही 'नो PUC नो फ्यूल' नियम को सख्ती से लागू किया जा रहा है, जिसका मतलब है कि बिना वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र के किसी भी वाहन को ईंधन नहीं दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इन उपायों की घोषणा एक 10 सूत्रीय 'विंटर एक्शन प्लान' के तहत की है, जो 28 फरवरी 2027 तक प्रभावी रहेगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य सर्दियों में हवा की गिरती गुणवत्ता को रोकना है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, बाहरी राज्यों के ऐसे पेट्रोल और डीजल वाहन जो BS6 स्टैंडर्ड के नहीं हैं, उन्हें निर्धारित तीन महीने की अवधि के दौरान दिल्ली की सीमा में घुसने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए सीएनजी (CNG) और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है।
परिवहन और पार्किंग पर पड़ेगा बड़ा असर
प्रशासन ने केवल एंट्री ही नहीं, बल्कि ईंधन की उपलब्धता और पार्किंग पर भी शिकंजा कसा है। अब शहर के सभी पेट्रोल पंपों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि वाहन चालक वैध PUC सर्टिफिकेट नहीं दिखाता है, तो उसे ईंधन देने से मना कर दिया जाए। इसके अलावा, निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए पूरे शहर में पार्किंग शुल्क को दोगुना कर दिया गया है। राहत की बात यह है कि इलेक्ट्रिक वाहनों और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) की सुविधाओं का उपयोग करने वालों को इस बढ़ी हुई पार्किंग फीस से छूट दी गई है।
सरकार का पूरा फोकस मुख्य रूप से कमर्शियल वाहनों, बसों और ट्रकों पर रहेगा। इस पूरी योजना को लागू करने के लिए पर्यावरण मंत्रालय, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस मिलकर काम कर रहे हैं। हालांकि, जुर्माने की राशि और बॉर्डर पर चेकिंग की सटीक प्रक्रिया अभी अंतिम समीक्षा के दौर में है। जानकारों का मानना है कि इन नियमों की सफलता पूरी तरह से इनके सख्त कार्यान्वयन और सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।
NCR से आने वाले उन लोगों के लिए यह बड़ी चुनौती होगी जो पुराने वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। सरकार वायु गुणवत्ता की लगातार निगरानी करेगी और यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो 'ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान' (GRAP) के तहत नियमों में और बदलाव किए जा सकते हैं। वाहन मालिकों और फ्लीट ऑपरेटर्स को सलाह दी गई है कि वे 1 नवंबर की समयसीमा से पहले अपनी तैयारी पूरी कर लें।