भीषण गर्मी से दिल्ली-NCR की महिला प्लेटफॉर्म वर्कर्स बेहाल, रिपोर्ट में बड़े खुलासे

दिल्ली-NCR में भीषण गर्मी का असर महिला प्लेटफॉर्म वर्कर्स पर बहुत ज्यादा पड़ रहा है। 'HeatWatch' की एक रिपोर्ट के अनुसार, 30-31 जुलाई 2026 के आसपास जारी और 8 अगस्त 2026 को 'टाइम्स ऑफ इंडिया' में प्रकाशित इस रिपोर्ट में महिला वर्कर्स की स्वास्थ्य और आर्थिक समस्याओं को सामने रखा गया है। यह रिपोर्ट ब्यूटी सर्विस, घरेलू काम, ई-कॉमर्स, फूड डिलीवरी और राइड-हailing से जुड़ी महिलाओं पर केंद्रित है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 71% महिलाएं हफ्ते के सातों दिन काम करती हैं और 65% महिलाएं दिन में एक या कोई ब्रेक नहीं लेती हैं।
- 86% महिला वर्कर्स को गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं हुईं।
- 69% वर्कर्स को बीमारी के कारण काम कम करना पड़ा या बंद करना पड़ा।
- 74% महिलाओं को उनकी कंपनियों (platforms) से कोई गर्मी से जुड़ी मदद नहीं मिली।
सर्वे में शामिल 86% महिलाओं ने कम से कम एक गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्या बताई। इन मुख्य लक्षणों में थकान या कमजोरी (77%), सिरदर्द (74%) और चक्कर आना (63%) शामिल हैं, जिन्हें 40% महिलाएं रोजाना महसूस करती हैं। इसके बावजूद, केवल 18% ने औपचारिक चिकित्सा सहायता ली, जबकि 82% ने या तो खुद से दवा ली (33%) या कुछ नहीं किया (43%)। अत्यधिक गर्मी के कारण 69% वर्कर्स को बीमारी की वजह से काम कम करना पड़ा या रोकना पड़ा। इससे गर्मियों में 71% की इनकम में गिरावट आई। इसके अलावा ठंडक, दवाइयों और ट्रांसपोर्ट पर खर्च भी बढ़ गया। शारीरिक बीमारियों के अलावा 51% महिलाओं ने तनाव और चिंता जैसे मानसिक लक्षण भी झेले।
रिपोर्ट में मदद की कमी की आलोचना की गई है। साफ पीने का पानी (27% के पास मुश्किल से या कोई पहुंच नहीं), शौचालय (43%), विश्राम स्थल (48%) और छायादार बैठने की जगह (51%) जैसी बुनियादी सुविधाएं काफी कम थीं। असुरक्षित प्रतीक्षा क्षेत्र और बिना वेतन वाली देखभाल की जिम्मेदारियां जैसी लैंगिक-विशिष्ट चुनौतियां स्थिति को और खराब करती हैं। HeatWatch की अपेक्षिता वार्ष्णेय ने जोर देकर कहा कि हीट-संवेदनशील एल्गोरिदम और पेड, पेनल्टी-मुक्त ब्रेक जैसे उपाय प्रभाव को कम कर सकते हैं। रिपोर्ट सिफारिश करती है कि सरकारें गर्मी के संपर्क में आने वाले प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए रोजगार की एक खंडनीय धारणा पेश करें। साथ ही यह कंपनियों से अपनी जिम्मेदारियों को स्वीकार करने, हीट-संवेदनशील गिग आवंटन लागू करने और ब्रेक तथा वास्तविक गर्मी से सुरक्षा की गारंटी देने का आग्रह करती है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने पहले ही 12 जून 2025 को एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें अनौपचारिक श्रमिकों के लिए शुरुआती/देर से शिफ्ट और पानी तथा छाया प्रदान करने जैसे उपायों की सिफारिश की गई थी।