दिल्ली NCR में बदहाल हुई 'नेकी की दीवार', मदद की जगह जमा हो रहा कचरा

दिल्ली NCR में जरूरतमंदों की मदद के लिए शुरू की गई दिल्ली नेकी की दीवार अब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। जिस पहल का मकसद बिना किसी दिखावे के गरीबों को कपड़े, जूते और खाना उपलब्ध कराना था, वह अब उपेक्षा का शिकार हो चुकी है। शहर के कई इलाकों में ये दीवारें अब खाली पड़ी हैं और वहां मदद के सामान की जगह मलबे और कूड़े के ढेर नजर आ रहे हैं, जिससे आम राहगीरों को भी परेशानी हो रही है।
इस गिरावट की एक बड़ी तस्वीर शकूरपुर के एक स्कूल की दीवार पर देखी जा सकती है, जहां ईंटों और कंक्रीट का मलबा जमा हो गया है। हालत यह है कि अब लोग यहां सामान दान करने से कतराने लगे हैं। गौरतलब है कि 'नेकी की दीवार' के कॉन्सेप्ट को जनवरी 2022 में दिल्ली सरकार के स्कूल सिस्टम का हिस्सा बनाया गया था। उस वक्त शहर के करीब 300 सरकारी स्कूलों की बाहरी दीवारों पर इसे लागू किया गया था, ताकि बच्चों और नागरिकों में निस्वार्थ मदद की भावना पैदा हो और लेने वाले की गरिमा भी बनी रहे।
ईरान से शुरू हुई थी यह मुहिम
इस नेक पहल की शुरुआत साल 2015 में ईरान के मशहद शहर से हुई थी, जिसे बाद में दुनिया के कई हिस्सों ने अपनाया। दिल्ली में भी इसे 'हैप्पीनेस करिकुलम' के साथ जोड़कर देखा गया था। लेकिन समय के साथ रखरखाव की कमी ने इस मुहिम की चमक फीकी कर दी है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर इन जगहों की नियमित सफाई और निगरानी की जाए, तो ये फिर से चैरिटी के केंद्र बन सकते हैं। फिलहाल, गंदगी और मलबे के कारण ये दीवारें अपना मूल उद्देश्य खोती जा रही हैं और सामुदायिक सहयोग के बजाय शहर की गंदगी बढ़ा रही हैं।