दिल्ली-NCR के ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर पर बनेगा नया शहर, 17 लाख घरों की तैयारी

दिल्ली-NCR में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) के जरिए 17 लाख नए घर बनाने की तैयारी है। जानें कैसे बदलेंगे ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर।

Kittu Kumari1 November 20262 min read0 viewsNCR
दिल्ली-NCR के ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर पर बनेगा नया शहर, 17 लाख घरों की तैयारी

दिल्ली और आसपास के इलाकों में सफर करने वालों के लिए आने वाला समय काफी बदलाव भरा होने वाला है। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) और नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) ने मिलकर एक खास वर्कशॉप आयोजित की, जिसमें Transit-Oriented Development (TOD) यानी ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट की रणनीतियों पर चर्चा की गई। इस योजना का मुख्य मकसद ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के आसपास ऐसे आधुनिक हब बनाना है, जहां रहने, काम करने और खरीदारी की सुविधाएं एक ही जगह मिल सकें।

इस पूरी योजना के केंद्र में दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ 'नमो भारत' कॉरिडोर के साथ-साथ प्रस्तावित दिल्ली-गुरुग्राम-SNB-अलवर और दिल्ली-पानीपत-करनाल लाइन्स हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस पहल के जरिए अगले 10 सालों में लगभग 17 लाख आवासीय इकाइयां (Residential Units) बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस विकास मॉडल का सबसे बड़ा उदाहरण सराय काले खां प्रोजेक्ट है, जो नमो भारत, दिल्ली मेट्रो, भारतीय रेलवे और ISBT को एक साथ जोड़कर एक मल्टीमॉडल हब के रूप में काम कर रहा है।

विकास के नियम और बुनियादी ढांचा

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पॉलिसी फ्रेमवर्क के मुताबिक, यह TOD पहल करीब 207 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली होगी। इसमें RRTS और रेलवे स्टेशनों के चारों ओर 500 मीटर का रेडियस और मेट्रो लाइनों के दोनों तरफ 500 मीटर का क्षेत्र शामिल है। निर्माण को बढ़ावा देने के लिए फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) को 500 तक रखा गया है, बशर्ते प्लॉट का न्यूनतम आकार 2,000 वर्ग मीटर हो।

आवास की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कुल FAR का 65% हिस्सा केवल रिहायशी इस्तेमाल के लिए अनिवार्य किया गया है। साथ ही, इसके लिए 10,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर का एक समान TOD शुल्क लागू होगा।

वर्कशॉप के दौरान मौजूद डेवलपर्स और उद्योग प्रतिनिधियों ने सरकार से कुछ मांगों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर निजी निवेश को बढ़ाना है, तो जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया को सरल बनाना होगा और 'सिंगल विंडो क्लीयरेंस' जैसी व्यवस्था लानी होगी ताकि कागजी कार्रवाई में समय बर्बाद न हो। इस बैठक में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की सचिव डी. थारा, DDA के उपाध्यक्ष एन. सरवणा कुमार, NCRTC के एमडी शलभ गोयल और NCRPB के सदस्य सचिव गुलजार नटराजन जैसे बड़े अधिकारी शामिल हुए, जिन्होंने भविष्य के शहरों को टिकाऊ और आधुनिक बनाने पर जोर दिया।

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