रोबोटिक सर्जरी में दिल्ली-NCR का दबदबा, देश का सबसे बड़ा हब बना यह क्षेत्र

Kittu Kumari3 October 20262 min read0 viewsNCR
रोबोटिक सर्जरी में दिल्ली-NCR का दबदबा, देश का सबसे बड़ा हब बना यह क्षेत्र

मेडिकल साइंस की दुनिया में दिल्ली-NCR अब एक नई पहचान बना चुका है। सोसाइटी ऑफ रोबोटिक सर्जरी (SRS) इंडिया 2026 कॉन्फ्रेंस से आए आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली-NCR अब भारत में दिल्ली एनसीआर रोबोटिक सर्जरी का सबसे प्रमुख केंद्र बन गया है। इस क्षेत्र में आधुनिक चिकित्सा तकनीक को इतनी तेजी से अपनाया गया है कि अब यहाँ की सुविधाएं दुनिया भर में चर्चा का विषय बन रही हैं।

आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली-NCR में अब 39 ऐसे अस्पताल हैं जो रोबोटिक सिस्टम से लैस हैं, जिनमें से 11 अस्पतालों के पास एक से ज्यादा रोबोटिक मशीनें मौजूद हैं। पिछले कुछ सालों में यहाँ सर्जरी की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है। साल 2021 में जहाँ यहाँ केवल 2,257 रोबोटिक प्रक्रियाएं हुई थीं, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 10,937 हो गई है। यह करीब पांच गुना की वृद्धि है, जो यह दिखाती है कि लोग अब पारंपरिक सर्जरी के मुकाबले रोबोटिक तकनीक पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं।

सर्जरी के प्रकार और भविष्य की राह

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अगर यह देखा जाए कि इन मशीनों का इस्तेमाल सबसे ज्यादा कहाँ हो रहा है, तो दिल्ली-NCR में करीब 33% मामलों में सामान्य सर्जरी (बेनाइन कंडीशंस), 30.2% यूरोलॉजी और 22.1% गायनोकोलॉजी के लिए इनका उपयोग किया गया। इसके अलावा कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों (मैलिग्नेंट कंडीशंस) की सर्जरी में 10% हिस्सेदारी रही, जबकि बाकी का इस्तेमाल कार्डियक, थोरैसिक और सिर व गर्दन की सर्जरी में हुआ।

इस मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि भारत स्वास्थ्य सेवा नवाचार के एक रोमांचक मोड़ पर खड़ा है। वहीं, विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए बताया कि अब रोबोटिक्स केवल सर्जरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डायग्नोस्टिक्स, थेरेपी, टेली-रोबोटिक्स और AI के जरिए हेल्थकेयर को और अधिक सटीक बनाया जाएगा।

मैक्स हॉस्पिटल, दिल्ली के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. विवेक बिंदल ने इस तरक्की का श्रेय क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुभव और कौशल को दिया है। वहीं सफदरजंग अस्पताल के डॉ. अनूप कुमार ने एक बड़ी भविष्यवाणी की है। उनका मानना है कि जिस रफ्तार से भारत तकनीक को अपना रहा है, साल 2030 तक भारत इस क्षेत्र में अमेरिका को भी पीछे छोड़कर ग्लोबल लीडर बन सकता है।

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