बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली-एनसीआर में लागू हुआ संशोधित ग्रेप

दिल्ली-एनसीआर में सर्दी के मौसम में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी CAQM ने संशोधित ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान लागू कर दिया है। इस नई व्यवस्था को 28 सितंबर 2026 को आयोग की 30वीं बैठक में मंजूरी दी गई थी। इस नए फ्रेमवर्क के तहत प्रतिबंधों को वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई के आधार पर चार चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में एक्यूआई 201 से 300, दूसरे चरण में 301 से 400, तीसरे चरण में 401 से 450 और चौथे चरण में 450 से ऊपर होने पर पाबंदियां लगाई जाती हैं।
कार्यालयों और सरकारी कामकाज के लिए नए नियम
संशोधित प्रोटोकॉल के अनुसार, चौथे चरण के सक्रिय होने पर सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए घर से काम करने का नियम है। दिल्ली सरकार की सर्दी की कार्य योजना के तहत 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक निजी दफ्तरों के लिए 50 प्रतिशत और सरकारी कर्मचारियों के लिए शत-प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य किया गया है। इसी अवधि के दौरान एमसीडी के कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक और जीएनसीटीडी के दफ्तर सुबह 10:00 बजे से शाम 6:30 बजे तक चलेंगे। सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए 1 नवंबर 2026 से अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना कर दिया जाएगा, जिसमें डीएमआरसी द्वारा प्रबंधित सुविधाएं शामिल नहीं हैं।
शिक्षा क्षेत्र और वाहनों पर प्रतिबंध
प्रदूषण के स्तर को देखते हुए शिक्षा क्षेत्र में हाइब्रिड लर्निंग मॉडल अपनाया जाएगा। तीसरे चरण में दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में पांचवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए यह विकल्प लागू हो जाता है। यदि प्रदूषण चौथे चरण तक पहुंच जाता है, तो यह नियम कक्षा 6 से 9 और 11वीं तक के लिए भी लागू हो जाता है। इसके अलावा, तीसरे चरण के तहत सोनीपत तक बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल हल्के मोटर वाहनों पर प्रतिबंध लगाया गया है तथा पहले चरण से ही अंतर-शहरी और अंतर-राज्यीय बसों पर भी प्रतिबंध लागू किए गए हैं।
तकनीकी और निर्माण कार्य से जुड़े कदम
एनसीआर के शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में 500 वर्ग मीटर से अधिक के निर्माण और विध्वंस परियोजनाओं के लिए निगरानी अनिवार्य कर दी गई है। तकनीकी पहलों के तहत 30 इलेक्ट्रिक मैकेनिकल सड़क सफाई मशीनों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर विकसित वास्तविक समय के पीएम2.5 और पीएम10 स्रोत निगरानी प्रणालियों को भी लगाया गया है, जिनका उद्देश्य 62 पहचाने गए प्रदूषण हॉटस्पॉट पर इसके प्रभाव को कम करना है।