दिल्ली-NCR में प्रॉपर्टी की कीमतों में 12% का उछाल, लग्जरी घरों की बढ़ी डिमांड

Kittu Kumari4 October 20262 min read0 viewsNCR
दिल्ली-NCR में प्रॉपर्टी की कीमतों में 12% का उछाल, लग्जरी घरों की बढ़ी डिमांड

अगर आप दिल्ली-NCR में घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। दिल्ली-NCR के रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी मार्केट में कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी गई है। साल 2026 की तीसरी तिमाही (Q3) के आंकड़ों के मुताबिक, इस क्षेत्र में घरों की कीमतों में सालाना आधार पर 12% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह भारत के सात सबसे बड़े हाउसिंग मार्केट्स में सबसे अधिक ग्रोथ रेट है।

मार्केट डेटा की बात करें तो, 2025 की तीसरी तिमाही में औसत रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमत 8,900 रुपये प्रति स्क्वायर फुट थी, जो 2026 की तीसरी तिमाही तक बढ़कर 9,980 रुपये प्रति स्क्वायर फुट हो गई है। गौर करने वाली बात यह है कि जहां पूरे देश के सात प्रमुख शहरों में औसत वार्षिक वृद्धि केवल 7% रही, वहीं दिल्ली-NCR ने 12% की बढ़त के साथ सबको पीछे छोड़ दिया है।

लग्जरी हाउसिंग और बुनियादी ढांचे का असर

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कीमतों में इस भारी उछाल के पीछे कई बड़े कारण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन की बढ़ती लागत और निर्माण सामग्री (कच्चे माल) के महंगे होने से कीमतों पर सीधा असर पड़ा है। खासकर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम जैसे हाई-डिमांड इलाकों में यह प्रभाव ज्यादा देखा गया है। इसके साथ ही, अब लोग प्रीमियम और लग्जरी घरों की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, तीसरी तिमाही में NCR में सप्लाई किए गए नए घरों में से 34% से अधिक घर ऐसे थे जिनकी कीमत 2.5 करोड़ रुपये से ज्यादा थी।

कीमतें बढ़ने के बावजूद बाजार में मजबूती बनी हुई है। हालांकि सालाना आधार पर घर की बिक्री में 1% की मामूली गिरावट आई है और लगभग 13,765 यूनिट्स बिकी हैं, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले बिक्री में 3% की वृद्धि दर्ज की गई है। नए एक्सप्रेसवे और मेट्रो विस्तार जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट ने इस बाजार को और रफ्तार दी है।

लंबे समय के रुझानों पर नजर डालें तो CII और नाइट फ्रैंक की एक रिपोर्ट बताती है कि 2015 से 2025 के बीच इस क्षेत्र में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमतों में करीब 193% का भारी उछाल आया है। M3M इंडिया, BPTP लिमिटेड और अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट लिमिटेड जैसे बड़े डेवलपर्स का मानना है कि लोग अब उन माइक्रो-मार्केट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं जहां कनेक्टिविटी बेहतर है और प्रीमियम सोशल इकोसिस्टम मौजूद है।

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