दिल्ली-NCR में प्रदूषण के बदलते स्रोतों की होगी जांच, 2040 तक का खाका तैयार करेगा यह अध्ययन

दिल्ली और NCR में प्रदूषण के बदलते स्रोतों को समझने के लिए एक व्यापक अध्ययन शुरू किया गया है, जो 2040 तक के रुझानों का विश्लेषण करेगा।

Kittu Kumari27 October 20262 min read0 viewsNCR
दिल्ली-NCR में प्रदूषण के बदलते स्रोतों की होगी जांच, 2040 तक का खाका तैयार करेगा यह अध्ययन

राजधानी दिल्ली और NCR के 27 जिलों में हवा की क्वालिटी को सुधारने के लिए अब एक बेहद विस्तृत और वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है। इस रिसर्च का मुख्य मकसद यह समझना है कि पिछले दस सालों में प्रदूषण फैलाने वाले कारकों में क्या बदलाव आए हैं। यह अध्ययन सिर्फ वर्तमान स्थिति को ही नहीं देखेगा, बल्कि 2030, 2035 और 2040 तक के उत्सर्जन रुझानों का अनुमान भी लगाएगा, ताकि भविष्य के लिए सटीक योजनाएं बनाई जा सकें।

इस बड़े प्रोजेक्ट की कमान पुणे स्थित ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के हाथों में है। इसमें IIT-दिल्ली, द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटियोरोलॉजी (IITM), पुणे जैसे प्रतिष्ठित संस्थान मिलकर काम कर रहे हैं। इस पूरी पहल को सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) फंड कर रहा है, जबकि इसका मूल ढांचा अप्रैल 2025 में कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) द्वारा तैयार किया गया था।

हाई-टेक मैपिंग और नई लैब से खुलेगा प्रदूषण का राज

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इस अध्ययन को बेहद सटीक बनाने के लिए 500 मीटर x 500 मीटर की हाई-रिज़ॉल्यूशन मैपिंग और ग्राउंड वेरिफिकेशन का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2026 तक चलेगी और इसका अंतिम विश्लेषण 2027 के मध्य तक आने की उम्मीद है।

इसी कड़ी में, केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने IITM की दिल्ली शाखा में 'इंटीग्रेटेड एटमॉस्फेरिक केमिस्ट्री एंड एरोसोल टॉक्सिसिटी एनालिसिस लेबोरेटरी' (AATAL) का उद्घाटन किया। मंत्री सिंह ने स्पष्ट किया कि यह लैब केवल प्रदूषण के स्तर की निगरानी नहीं करेगी, बल्कि यह गहराई से जांच करेगी कि प्रदूषकों की संरचना क्या है और वे असल में कहां से आ रहे हैं।

हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो AATAL की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में दिल्ली के PM2.5 स्तर में वाहनों और सेकेंडरी ऑर्गेनिक व इनऑर्गेनिक एरोसोल्स की सबसे बड़ी भूमिका रही है। वहीं, सरकार ने IIT दिल्ली के साथ 19.22 करोड़ रुपये के पांच साल के समझौते को मंजूरी दी है, जिससे PM2.5 और PM10 कणों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और उनके स्रोतों की पहचान आसान हो सकेगी।

दिलचस्प बात यह है कि थिंक टैंक 'एनविरोकैटलिस्ट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, CPCB और CAQM के आंकड़ों के आधार पर दिल्ली में प्रमुख प्रदूषकों का स्तर पिछले वर्षों की तुलना में कम रहा है। अब इस व्यापक अध्ययन से मिलने वाले सबूतों का इस्तेमाल भविष्य में वायु गुणवत्ता नियंत्रण के कड़े और प्रभावी उपाय करने के लिए किया जाएगा।

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