दिल्ली-NCR में प्रदूषण के हॉटस्पॉट्स की होगी हाई-रिजॉल्यूशन मैपिंग, 10 साल के ट्रेंड्स का होगा विश्लेषण

दिल्ली और NCR के 27 जिलों में प्रदूषण के हॉटस्पॉट्स की पहचान के लिए एक बड़ा अध्ययन शुरू हुआ है, जिससे 2040 तक की एयर क्वालिटी का अनुमान लगेगा।

Kittu Kumari27 October 20262 min read0 viewsNCR
दिल्ली-NCR में प्रदूषण के हॉटस्पॉट्स की होगी हाई-रिजॉल्यूशन मैपिंग, 10 साल के ट्रेंड्स का होगा विश्लेषण

राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में हवा की सेहत सुधारने के लिए अब तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। दिल्ली और NCR के 27 जिलों में प्रदूषण के स्रोतों का सटीक पता लगाने के लिए एक व्यापक अध्ययन शुरू किया गया है। इस पहल का मकसद यह समझना है कि पिछले एक दशक में प्रदूषण फैलाने वाले कारकों में क्या बदलाव आए हैं और आने वाले समय में हवा की गुणवत्ता कैसी रहेगी।

सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) द्वारा वित्त पोषित इस प्रोजेक्ट में 500 मीटर x 500 मीटर की हाई-रिजॉल्यूशन मैपिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका मतलब है कि अब शहर के बहुत छोटे हिस्सों में भी यह पता लगाया जा सकेगा कि प्रदूषण असल में कहां से आ रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में ग्राउंड वेरिफिकेशन भी किया जाएगा ताकि डेटा पूरी तरह सटीक हो। इस स्टडी का नेतृत्व पुणे स्थित ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) कर रहा है, जिसमें IIT-दिल्ली, TERI और IITM पुणे जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं।

2040 तक की एयर क्वालिटी का मिलेगा अनुमान

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CAQM के टेक्निकल मेंबर एस.डी. अत्री इस प्रोजेक्ट की समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस हाई-रिजॉल्यूशन डेटा की मदद से प्रदूषण के 'हॉटस्पॉट्स' की पहचान करना आसान होगा। यह अध्ययन केवल वर्तमान स्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए 2030, 2035 और 2040 के लिए एयर क्वालिटी के परिदृश्यों का अनुमान लगाया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया 1 जनवरी से 31 दिसंबर 2026 तक चलेगी और इसका विश्लेषण 2027 के मध्य तक पूरा कर लिया जाएगा।

इस स्टडी के तहत PM10, PM2.5, नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और मीथेन जैसे कई प्रदूषकों पर नजर रखी जाएगी। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्थानीय प्रदूषण स्रोतों पर विशेष ध्यान दें ताकि जवाबदेही तय की जा सके।

हाल ही में AATAL लैब से मिले आंकड़ों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में PM2.5 प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वाहन (25%) हैं। इसके बाद सेकेंडरी ऑर्गेनिक एरोसोल (18.4%), सेकेंडरी इनऑर्गेनिक एरोसोल (16.5%), सड़क की धूल (10.9%) और कचरा जलाने (5%) का नंबर आता है।

प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने कई कड़े कदम उठाए हैं, जिनमें 'नो PUC, नो फ्यूल' पॉलिसी और विंटर एक्शन प्लान 2026-27 शामिल हैं। साथ ही, दिल्ली कैबिनेट ने रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए IIT दिल्ली के साथ 19.22 करोड़ रुपये की पांच साल की साझेदारी को भी मंजूरी दी है। राहत की बात यह है कि 24 अक्टूबर 2026 को दिल्ली का AQI 191 दर्ज किया गया, जो महामारी के समय को छोड़कर पिछले दस वर्षों में इस तारीख का सबसे निचला स्तर था।

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