दिल्ली-NCR में प्रदूषण रोकने के लिए कड़े नियम लागू, BS-IV गाड़ियों की होगी एंट्री बंद

दिल्ली और एनसीआर में हर साल की तरह इस बार भी हवा की गुणवत्ता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। 3 अक्टूबर 2026 तक प्रदूषण का स्तर 'हानिकारक' और 'मध्यम' के बीच बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय और अरावली पर्वतमालाओं के बीच स्थित होने के कारण यह पूरा इलाका एक 'कटोरे' की तरह काम करता है, जिससे प्रदूषक तत्व बाहर नहीं निकल पाते और हवा में ही फंसे रहते हैं। सर्दियों में कम हवा की गति और तापमान के बदलाव इस समस्या को और गंभीर बना देते हैं।
इस संकट से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अध्यक्ष राजेश वर्मा के नेतृत्व में 1 अक्टूबर 2026 से कई सख्त नियम लागू किए गए हैं। इनमें सबसे अहम 'नो पीयूसीसी, नो फ्यूल' (No PUCC, No Fuel) का आदेश है, जिसका मतलब है कि बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के वाहनों में ईंधन नहीं भरा जा सकेगा। इसके अलावा, ग्रैडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को अपडेट किया गया है ताकि प्रदूषण बढ़ने से पहले ही एहतियाती कदम उठाए जा सकें।
वाहनों और निर्माण कार्यों पर रहेगी सख्त पाबंदी
प्रदूषण को कम करने के लिए प्रशासन ने वाहनों के प्रवेश पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। 1 नवंबर से 31 जनवरी 2027 तक BS-IV श्रेणी के वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी; केवल BS-VI, इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों को ही अनुमति मिलेगी। वहीं, निर्माण कार्यों पर भी लगाम लगाते हुए 10 दिसंबर से 20 जनवरी 2027 तक छह हफ्ते का बैन लगाया गया है।
ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए 1 नवंबर से पार्किंग शुल्क दोगुना कर दिया गया है और 1 नवंबर से 28 फरवरी तक ऑफिस के समय में बदलाव (Staggered hours) किया जाएगा। साथ ही, वाहनों के उत्सर्जन को घटाने के लिए 50% वर्क-फ्रॉम-होम का प्रावधान भी किया गया है।
निगरानी को पुख्ता करने के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के लिए एक इंटीग्रेटेड कमांड और कंट्रोल सेंटर का उद्घाटन किया है। यह सेंटर एआई (AI), जीपीएस और सीसीटीवी तकनीक की मदद से 700 से अधिक निर्माण स्थलों पर नजर रखेगा। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के साथ मिलकर इन प्रयासों की देखरेख कर रहे हैं।
प्रशासन उन उद्योगों पर भी सख्ती बरत रहा है जो नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। CAQM ने ऐसी 85 औद्योगिक इकाइयों की पहचान की है जिनके पास या तो प्रदूषण नियंत्रण उपकरण नहीं थे या वे बिना वैध परमिट के चल रहे थे; इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, राहत की बात यह है कि सितंबर 2026 में दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) पिछले पांच वर्षों में सबसे कम दर्ज किया गया है, जो सुधार की ओर एक संकेत है।