दिल्ली-NCR में मानवीय उत्सर्जन कम करने से 60% तक घट सकता है PM2.5 स्तर: स्टडी
NIAS की स्टडी के अनुसार, मानवीय उत्सर्जन में कटौती से दिल्ली-NCR में PM2.5 का स्तर 60% तक गिर सकता है। जानें पूरी रिपोर्ट।

राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों (NCR) में जहरीली हवा से निजात पाने के लिए एक नई उम्मीद जगी है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (NIAS) के शोधकर्ताओं, उम्मेद सिंह सहारण और गुफरान बेग की एक ताजा स्टडी में दावा किया गया है कि अगर दिल्ली-NCR क्षेत्र में मानवीय गतिविधियों से होने वाले उत्सर्जन (anthropogenic emissions) पर सख्ती से नियंत्रण पाया जाए, तो स्थानीय PM2.5 के स्तर में लगभग 60% की भारी गिरावट आ सकती है। इतना ही नहीं, इस कदम से राष्ट्रीय औसत प्रदूषण स्तर में भी 10% की कमी आने की संभावना है।
'एयरशेडम' मॉडल से होगा प्रदूषण का सटीक समाधान
इस शोध का शीर्षक 'एयरशेडम-आधारित शमन भारत में स्वच्छ हवा का एक मार्ग' है। शोधकर्ताओं ने साल 2000 से 2023 तक के जलवायु आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण किया है। स्टडी में सुझाव दिया गया है कि पूरे देश को 16 अलग-अलग 'एयरशेडम' (Airshedems) में बांटा जाना चाहिए ताकि प्रदूषण प्रबंधन को अधिक सटीक और लक्षित बनाया जा सके।
दिल्ली-NCR, हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ को 'एयरशेडम-2' (AS-2) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इस क्षेत्र को उच्च-उत्सर्जन क्षेत्र माना गया है, जिसके मुख्य कारणों में भारी परिवहन, घनी आबादी, औद्योगिक गतिविधियां, घरों में बायोफ्यूल का उपयोग और पराली जलाना शामिल है।
यह वैज्ञानिक अध्ययन ऐसे समय में आया है जब दिल्ली की हवा बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। उदाहरण के तौर पर, 3 नवंबर 2026 को शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 348 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के डेटा के अनुसार, उस दिन दिल्ली के PM2.5 स्तर में 15.301% योगदान केवल पराली जलाने का था।
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 2 नवंबर 2026 से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू कर दिया है। इसके तहत NCR में धूल उड़ाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही, कुछ कार्यालयों के लिए 5 नवंबर से 20 नवंबर 2026 तक 50% वर्क-फ्रॉम-होम की नीति अनिवार्य की गई है।