दिल्ली-NCR में 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' नियम लागू, बिना सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

सर्दियों में बढ़ने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली और एनसीआर (NCR) में एक बड़ा और सख्त कदम उठाया गया है। अब शहर के पेट्रोल पंपों पर 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' (No PUC, No Fuel) का नियम लागू कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि जिस वाहन के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC Certificate) नहीं होगा, उसे पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं दी जाएगी।
कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) द्वारा जारी इस निर्देश का मकसद वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना है। अब ईंधन स्टेशनों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे ईंधन भरने से पहले वाहन के प्रदूषण स्तर की जांच करें। इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए गए हैं, जिन्हें सीधे 'वाहन' पोर्टल के डेटाबेस से जोड़ा गया है। जैसे ही कोई बिना PUC वाला वाहन पंप पर आएगा, सिस्टम उसके मालिक को तुरंत नोटिफिकेशन भेज देगा और उसे नया सर्टिफिकेट बनवाने की सलाह दी जाएगी।
नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना और जेल की सजा
अगर कोई वाहन चालक इस नियम का उल्लंघन करता है या बिना वैध PUC सर्टिफिकेट के गाड़ी चलाता है, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। नियमों के मुताबिक, ऐसे मामलों में 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और गंभीर स्थिति में तीन महीने तक की जेल भी हो सकती है। हालांकि, राहत की बात यह है कि मेडिकल इमरजेंसी, कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन से जुड़ी आपातकालीन सेवाओं को इस नियम से छूट दी गई है।
प्रशासन का दावा है कि इस सख्ती के बाद से PUC सर्टिफिकेट बनवाने वालों की संख्या में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह कदम विंटर एक्शन प्लान का हिस्सा है, जिसे पर्यावरण मंत्री मनिंदर सिंह सिरसा और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में लागू किया जा रहा है।
प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए केवल ईंधन पर ही पाबंदी नहीं है, बल्कि अन्य कड़े कदम भी उठाए गए हैं:
- 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण और तोड़फोड़ (C&D) गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा।
- 1 नवंबर से दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड कुछ खास वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।
- सरकारी और निजी क्षेत्रों में 50 फीसदी कर्मचारियों के लिए वर्क-फ्रॉम-होम को बढ़ावा दिया जा रहा है।
फिलहाल दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 'खराब' से 'बहुत खराब' के बीच बना हुआ है। हालांकि मौसम विभाग को उम्मीद है कि बारिश और तेज हवाओं से थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि हवा की रफ्तार कम होते ही प्रदूषण का स्तर फिर से बढ़ सकता है।