दिल्ली-NCR में प्रॉपर्टी की कीमतों में भारी उछाल, सालभर में 12% बढ़े दाम

अगर आप दिल्ली-NCR में घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी ANAROCK के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही में दिल्ली-NCR के प्राइमरी हाउसिंग मार्केट में औसत प्रॉपर्टी की कीमतों में साल-दर-साल 12% की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अब यहाँ प्रॉपर्टी की औसत कीमत 9,980 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुँच गई है, जो पिछले साल इसी समय 8,900 रुपये प्रति वर्ग फुट थी।
हैरानी की बात यह है कि भारत के सात बड़े शहरों में सबसे ज्यादा बढ़त दिल्ली-NCR में ही देखी गई है, जबकि बेंगलुरु 8% की बढ़त के साथ दूसरे स्थान पर रहा। पूरे देश के सात प्रमुख शहरों की सामूहिक वृद्धि दर 7% रही है। हालांकि, कीमतों में इस उछाल के बावजूद घरों की बिक्री में मामूली गिरावट आई है और नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग में भी 14% की कमी देखी गई है।
क्यों बढ़ रहे हैं घरों के दाम?
विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में इस तेजी के पीछे कई बड़े कारण हैं। निर्माण सामग्री और जमीन की बढ़ती लागत ने डेवलपर्स को कीमतें बढ़ाने पर मजबूर किया है। साथ ही, अब डेवलपर्स का ज्यादा ध्यान लग्जरी प्रोजेक्ट्स पर है। इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार और द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स ने भी प्रॉपर्टी की वैल्यू बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
ANAROCK के वाइस चेयरमैन संतोष कुमार के अनुसार, महामारी के बाद से जमीन और निर्माण सामग्री की लागत काफी बढ़ गई है, जिसका असर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम की जमीन की दरों पर साफ दिख रहा है। वहीं, M3M इंडिया के प्रेसिडेंट रॉबिन मंगला का कहना है कि बेहतर कनेक्टिविटी वाले माइक्रो-मार्केट्स अब प्रीमियम दाम वसूल रहे हैं।
BPTP लिमिटेड के सीईओ माणिक मलिक और अल्फा कॉर्प के आशीष सरीन ने इस बात पर जोर दिया कि प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट की मांग स्थिर बनी हुई है। अब खरीदार घर को सिर्फ एक निवेश के तौर पर नहीं, बल्कि एक लंबी अवधि की जरूरत के रूप में देख रहे हैं।
लंबे समय के रुझानों पर नजर डालें तो CII और नाइट फ्रैंक की एक रिपोर्ट बताती है कि 2015 से 2025 के बीच दिल्ली-NCR में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमतों में लगभग 193% की जबरदस्त वृद्धि हुई है। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स गुरुग्राम और नोएडा जैसे इलाकों में बाजार सुधार (मार्केट करेक्शन) की संभावना जता रहे हैं, क्योंकि वहां सट्टेबाजी वाली खरीदारी को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।