Delhi-NCR Housing Market: 2026 की पहली छमाही में घटी घरों की बिक्री, महंगी प्रॉपर्टी ने बढ़ाई टेंशन!

दिल्ली-NCR के रियल एस्टेट मार्केट के लिए साल 2026 की शुरुआत कुछ खास नहीं रही है। साल 2026 की पहली छमाही में दिल्ली-NCR का हाउसिंग मार्केट काफी धीमा रहा और यह देश का इकलौता ऐसा बड़ा मार्केट रहा जिसका प्रदर्शन कमजोर रहा है। इस दौरान क्षेत्र में होम सेल्स में वैल्यू के हिसाब से 7% और बेचे गए यूनिट्स के मामले में 18% की भारी गिरावट दर्ज की गई, और कुल 24,862 यूनिट्स ही बिक पाईं। यह ट्रेंड साल 2026 की दूसरी तिमाही (Q2) में भी जारी रहा, जब पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले बिक्री 6% घटकर 13,365 यूनिट्स रह गई।
प्रॉपर्टी के दामों में जबरदस्त उछाल और नए प्रोजेक्ट्स में गिरावट
बिक्री की रफ्तार धीमी होने के बावजूद, Q2 2026 में दिल्ली-NCR में घरों की औसत कीमतों में सालाना आधार पर 13% की चौंकाने वाली बढ़ोतरी हुई। देश के बड़े शहरों में यह सबसे ज्यादा तेजी है, जिसमें दिल्ली और फरीदाबाद में हर जगह 18% की बढ़ोतरी देखने को मिली। हालांकि, इसके साथ ही Q2 2026 में नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च होने में 40% की भारी गिरावट आई, खासकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में नई सप्लाई में 72% की भारी कमी दर्ज की गई।
लक्जरी घरों की बहार और मिडिल क्लास के लिए घटते विकल्प
Overall मार्केट की सुस्ती के उलट, ₹1 करोड़ से ज्यादा कीमत वाले प्रीमियम रेजिडेंशियल मार्केट में Q1 2026 में बिक्री सालाना आधार पर 30% की जोरदार तेजी के साथ बढ़ी। यह प्रीमियम सेगमेंट सभी रेजिडेंशियल ट्रांजैक्शंस का लगभग 71% हिस्सा बना रहा और इस सेगमेंट में नए लॉन्च भी 64% बढ़ गए।
experts का मानना है कि खरीदारों में जो हिचकिचाहट दिख रही है, उसकी मुख्य वजह अफोर्डेबिलिटी का संकट है। प्रॉपर्टी के दाम सैलरी बढ़ने की रफ्तार से काफी आगे निकल चुके हैं, जिससे डाउन पेमेंट और EMI चुकाना बहुत भारी पड़ने लगा है। डेवलपर्स का ज्यादा मुनाफे वाले लग्जरी हाउसिंग की तरफ शिफ्ट होना भी इसकी एक वजह है, जिससे किफायती घरों की कमी हो गई है और मिडिल क्लास की डिमांड से यह मेल नहीं खा रहा। इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव और IT/ITeS सेक्टर में AI से जुड़ी आर्थिक अनिश्चितताओं ने खरीदारों को और सतर्क कर दिया है। इसी वजह से कई लोग घर खरीदने का फैसला टाल रहे हैं या फिर शहर के बाहरी इलाकों में छोटे घर तलाश रहे हैं।