दिल्ली-NCR में बढ़ा प्रदूषण, CAQM ने लागू किया GRAP स्टेज 1; अब इन नियमों का पालन करना होगा जरूरी

राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ रही है, जिसे देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने एक्शन लिया है। दिल्ली-NCR क्षेत्र में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को नियंत्रित करने के लिए आधिकारिक तौर पर दिल्ली NCR GRAP स्टेज 1 लागू कर दिया गया है। बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 244 दर्ज किया गया, जो कि पिछले दिन के 179 (मध्यम स्तर) के मुकाबले काफी ज्यादा है।
प्रदूषण के इस बढ़ते ग्राफ को देखते हुए CAQM की सब-कमेटी ने तुरंत कदम उठाए हैं। अब सड़कों पर चलने वाले वाहनों के लिए 'प्रदूषण नियंत्रण' (PUC) सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिया गया है और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, डीजल जनरेटर सेटों के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई गई है और होटलों व रेस्टोरेंट्स में कोयले के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। धूल को दबाने के लिए सड़कों पर वैक्यूम स्वीपिंग और पानी के छिड़काव की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्माण कार्यों और कचरा जलाने पर रहेगी नजर
प्रशासन अब निर्माण और विध्वंस (C&D) साइटों की निगरानी बढ़ाएगा ताकि धूल न उड़े। साथ ही, खुले में कचरा जलाने वालों के खिलाफ भी सख्ती बरती जाएगी। नए नियमों के मुताबिक, यात्रा प्रतिबंधों के दायरे को बढ़ाते हुए अब गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर के साथ-साथ सोनीपत को भी शामिल किया गया है। अंतर-राज्यीय और अंतर-शहर बसों के लिए केवल इलेक्ट्रिक, CNG या BS-VI डीजल वाहनों के संचालन की अनुमति होगी।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि सरकार केंद्र के साथ तालमेल बिठाकर स्थानीय प्रदूषण स्रोतों को रोकने के लिए 11 सूत्रीय कार्ययोजना पर काम कर रही है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें, अपने वाहनों के इंजन का रखरखाव रखें और प्रदूषण की शिकायत के लिए 'ग्रीन दिल्ली', 'समीर' और 311 ऐप का इस्तेमाल करें।
मौसम विभाग (IMD) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के अनुमान के मुताबिक, आने वाले कुछ दिनों तक हवा की गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में रहने की संभावना है। गौरतलब है कि CAQM ने 29 सितंबर 2026 को ही GRAP ढांचे में संशोधन कर दिया था, ताकि 1 अक्टूबर से ही मौसमी उपायों को शुरू किया जा सके।