विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस: दिल्ली-एनसीआर में डेटा की कमी से प्रदूषण नीति में आ रही बाधा

विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस के मौके पर विशेषज्ञों ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर चिंता जताई है। क्षेत्र में खराब हवा, दूषित पानी और शोर प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएं हैं। लेकिन इसके स्रोतों और प्रभावों का पूरा वैज्ञानिक डेटा न होने के कारण सही नीतियां नहीं बन पा रही हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा शुरू किए गए इस दिवस का नेतृत्व इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ पर्यावरणीय हेल्थ (IFEH) करता है। साल 2026 की थीम विज्ञान के साथ खड़े होकर समुदायों की रक्षा करना है। WHO की रिपोर्ट के मुताबिक वायु प्रदूषण और अशुद्ध पानी से दिल की बीमारी, दमा, और हैजा जैसी घातक बीमारियां होती हैं।
मानसून के जाने के बाद दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार बढ़ रहा है। 19 सितंबर को एक्यूआई 118, 20 सितंबर को 160, 21 सितंबर को 169, 22 सितंबर को 178 और 23 सितंबर को 151 दर्ज किया गया। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति इन आंकड़ों पर नजर रखती है लेकिन मैदानी स्तर पर काम ठीक से नहीं हो रहा है।
दिल्ली सरकार 1 नवंबर से 28 फरवरी तक सर्दी के प्रदूषण के लिए नियम लागू करती है। इसमें निर्माण कार्यों पर रोक, दफ्तरों में आधी उपस्थिति और पार्किंग फीस बढ़ाना शामिल है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रदूषण बढ़ने का इंतजार किए बिना समय से पहले कड़े कदम उठाएं।