दिल्ली-एनसीआर में तेजी से बढ़ रहा इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण उद्योग

दिल्ली का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग अब केवल मोबाइल, कंप्यूटर और लैपटॉप बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तेजी से कंपोनेंट्स और तकनीकी सेवाओं के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। नेहरू पैलेस, भागीरथ पाल और लाजपत राय मार्केट जैसे बड़े बाजार इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ऑल दिल्ली कंप्यूटर ट्रेडर्स एसोसिएशन (ADCTA) के अध्यक्ष महिंदर अग्रवाल के अनुसार, छोटे उद्योगों को मिलने वाले समर्थन से एडाप्टर, कनेक्टर और सीसीटीवी कैमरों का निर्माण बढ़ा है, जिससे नए व्यापार और रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। दिल्ली और एनसीआर में इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी सेवाओं का क्षेत्र बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है।
भारत सरकार ने अगस्त 2026 तक 15 राज्यों में 106 इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें करीब 70,000 करोड़ रुपये का निवेश और 75,000 नौकरियां शामिल हैं। इनमें से 38 प्लांट, जो प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, पैसिव कंपोनेंट्स और कैमरा मॉड्यूल पर ध्यान केंद्रित करते हैं, उत्पादन शुरू कर चुके हैं। इस बारे में अधिक जानकारी PIB Factsheet पर देखी जा सकती है। देश भर में कंपोनेंट निर्माण और सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2026 को "सेमिकॉन इंडिया 2026" के उद्घाटन के दौरान पुष्टि की कि 12 चिप निर्माण परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है और "इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0" का बजट बढ़ा दिया गया है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स देश का पहला 300-मिलीमीटर सेमीकंडक्टर Fab बना रही है, और ग्लोबल कंपनियां भी भारत में आ रही हैं। साल 2030 तक घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
क्षेत्रीय स्तर पर, गौतम बुद्ध नगर एक प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स हब के रूप में विकसित हो रहा है, जिसे दिल्ली सरकार की जुलाई 2022 की "इलेक्ट्रॉनिक सिटी" योजना का भी समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा, 21 सितंबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, एआई बुनियादी ढांचे में निवेश के कारण वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार 2026 तक 1.6 ट्रिलियन डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए बुनियादी ढांचा तेजी से विकसित हो रहा है।