बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए दिल्ली-NCR के स्कूलों और DCPCR ने कसी कमर

Kittu Kumari12 October 20262 min read0 viewsNCR
बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए दिल्ली-NCR के स्कूलों और DCPCR ने कसी कमर

दिल्ली और एनसीआर में बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाए जा रहे हैं। हाल ही में मानेसर के सूरज स्कूल में कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट डॉ. ऋचा त्रिवेदी ने तनाव प्रबंधन और भावनात्मक मजबूती (इमोशनल रेजिलिएंस) के तरीके सिखाए। इस दौरान छात्रों को यह समझाया गया कि मानसिक परेशानी होने पर पेशेवर मदद लेने में कोई बुराई नहीं है।

इसी कड़ी में दिल्ली आयोग फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (DCPCR) ने भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। DCPCR ने IHBAS की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. शहजादी मल्होत्रा के नेतृत्व में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए एक ट्रेनिंग सेशन आयोजित किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ऑटिज्म और अन्य मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों के शुरुआती लक्षणों को पहचानने में सक्षम बनाना था, ताकि बच्चों को समय रहते सही उपचार मिल सके।

स्क्रीन टाइम और 'वर्चुअल ऑटिज्म' का खतरा

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DCPCR के चेयरपर्सन डॉ. ओम व्यास ने एक गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने 'वर्चुअल ऑटिज्म' का मुद्दा उठाया, जो बच्चों द्वारा स्क्रीन (मोबाइल, टैबलेट) के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण हो रहा है। डॉ. व्यास ने समाज से अपील की है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सामाजिक वर्जनाओं और शर्म को खत्म किया जाए ताकि बच्चे खुलकर अपनी बात कह सकें।

विशेषज्ञों के आंकड़े डराने वाले हैं। एम्स दिल्ली के प्रोफेसर राजेश सागर के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत वाले 80-90% बच्चों को सही इलाज नहीं मिल पाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि वयस्कों में होने वाले 50% से अधिक मानसिक विकार 14 साल की उम्र से पहले ही शुरू हो जाते हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर भी केंद्र सरकार इस दिशा में काम कर रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में 'टेली-मानस' (Tele-MANAS) प्रोग्राम को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14416 के जरिए अब तक 4.77 करोड़ से ज्यादा कॉल हैंडल किए जा चुके हैं। इसके अलावा, दिल्ली स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी और कई शैक्षणिक संस्थान अब मनोवैज्ञानिक सहायता को पढ़ाई के माहौल का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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