दिल्ली-NCR में बस स्टॉप की भारी कमी, सड़क किनारे खड़े होने को मजबूर यात्री
दिल्ली-NCR में बस स्टॉप की कमी से यात्री सड़क किनारे खड़े होने को मजबूर, वहीं प्रदूषण रोकने के लिए BS-VI मानक लागू होंगे।

दिल्ली-NCR के यात्रियों के लिए सफर अब और भी मुश्किल होता जा रहा है। खासकर सोनिया विहार नानकसर से चौहान पट्टी बस डिपो के बीच के इलाके में बस स्टॉप की इतनी कमी है कि लोगों को सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। इस अव्यवस्था के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उनके पास बैठने या धूप-बारिश से बचने के लिए कोई शेल्टर उपलब्ध नहीं है।
हालांकि, दिल्ली सरकार ने मई 2026 में बस स्टॉप्स के आधुनिकीकरण की योजना पेश की थी। इस योजना के तहत स्मार्ट फीचर्स जैसे पैनिक बटन, डिजिटल पब्लिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (PIS) और मौसम की जानकारी देने वाले सिस्टम लगाए जाने थे, ताकि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा बढ़ सके। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई इलाकों में बुनियादी ढांचे का अब भी अभाव है।
प्रदूषण पर लगाम: BS-VI मानक वाली बसों को ही मिलेगी एंट्री
एक तरफ बुनियादी ढांचे की कमी है, तो दूसरी तरफ प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं। ग्रैडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) फेज-1 के तहत, 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक उन अंतर-राज्यीय और अंतर-शहर बसों के दिल्ली-NCR में प्रवेश पर रोक होगी, जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करती हैं। ट्रैफिक पुलिस के स्पेशल कमिश्नर अजय चौधरी ने 22 अक्टूबर 2026 को एक बैठक में इसकी पुष्टि की।
इन नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पड़ोसी राज्यों के साथ तालमेल बिठाया है और आपसी संचार के लिए एक समर्पित व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया है। इसके अलावा, सितंबर 2026 के नए नियमों के मुताबिक, सभी बसों में पैनिक बटन और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) होना अनिवार्य है। नियमों का पालन न करने वाली बसों के परमिट रद्द किए जा सकते हैं।
परेशानियां यहीं खत्म नहीं होतीं। निजी वाहनों के उपयोग को कम करने के लिए 1 नवंबर से पार्किंग शुल्क दोगुना किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर दबाव और बढ़ेगा, जबकि पहले से ही बस ड्राइवर हड़ताल और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। हालांकि, 'परिवर्तन' योजना के जरिए पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को इको-फ्रेंडली विकल्पों से बदलने की कोशिश जारी है।