दिल्ली-NCR की हवा हुई जहरीली, CAQM ने निर्माण कार्यों पर लगाई रोक, ऑफिसों में लागू हुआ वर्क फ्रॉम होम
दिल्ली-NCR में AQI 377 तक पहुंचा। CAQM ने निर्माण कार्यों पर रोक लगाई और ऑफिसों में 50% वर्क फ्रॉम होम का निर्देश दिया है।

दिल्ली और आसपास के इलाकों में सांस लेना एक बार फिर मुश्किल होता जा रहा है। 4 नवंबर 2026 को दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता (Air Quality) काफी खराब स्तर पर पहुंच गई है, जहां औसत AQI 377 दर्ज किया गया। यह पिछले 288 दिनों का सबसे उच्चतम स्तर है। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और दिवाली से पहले बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि 7 नवंबर तक हालात गंभीर बने रह सकते हैं।
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने कड़े कदम उठाए हैं। 5 नवंबर से 20 नवंबर तक पूरे एनसीआर क्षेत्र में धूल उड़ाने वाले विध्वंस कार्यों और बाहरी निर्माण गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि, राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं जैसे रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट, अस्पताल, जल आपूर्ति और स्वच्छता कार्यों को इस पाबंदी से बाहर रखा गया है। वर्क कल्चर में भी बड़ा बदलाव किया गया है; दिल्ली और पांच सटे हुए जिलों—गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर—के सरकारी और निजी कार्यालयों को निर्देश दिया गया है कि केवल 50% कर्मचारी ही ऑफिस आएं, बाकी स्टाफ वर्क फ्रॉम होम करेगा। यह नियम उन आवश्यक सेवाओं पर लागू नहीं होगा जहां घर से काम करना संभव नहीं है।
पराली और स्थानीय प्रदूषण का असर
प्रदूषण के कारणों पर नजर डालें तो ICAR-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान और CREAMS लैब के सैटेलाइट डेटा के अनुसार, 4 नवंबर को छह राज्यों में 467 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है और वर्तमान में दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण में इसका योगदान लगभग 20% है। इसके बावजूद, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे संस्थान चिंतित हैं क्योंकि स्थानीय स्तर पर होने वाला प्रदूषण और मौसम का मिजाज हवा की गुणवत्ता को और अधिक बिगाड़ रहा है।