दिल्ली-NCR की हवा में सुधार, लेकिन कुछ इलाकों में अब भी प्रदूषण की चुनौती
दिल्ली-NCR की हवा में सुधार दिखा है, लेकिन कुछ इलाकों में प्रदूषण अब भी चुनौती है। जानें क्या है ताजा AQI और सरकार के कदम।

दिल्ली-NCR के निवासियों के लिए एक राहत भरी खबर है। राजधानी और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता (Delhi-NCR Air Quality) में सुधार के संकेत मिले हैं। 26 अक्टूबर 2026 को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 164 दर्ज किया गया, जिसे 'मध्यम' श्रेणी में रखा गया है। इससे पिछले दिन का आंकड़ा 153 था। हालांकि, राहत के इन आंकड़ों के बीच पर्यावरण अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि शहर के कुछ हिस्सों में प्रदूषण अब भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है।
अगर बारीकी से देखें तो सुधार के बावजूद कुछ मॉनिटरिंग स्टेशनों पर स्थिति चिंताजनक रही। 25 अक्टूबर को IIT दिल्ली में AQI 254, जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 229 और DTU में 203 तक पहुंच गया था। वहीं, NCR के अन्य शहरों में सुधार देखा गया, जहां 26 अक्टूबर को गुरुग्राम का AQI 143 और गाजियाबाद का 135 दर्ज किया गया।
प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार की सख्त तैयारी
हवा को साफ रखने के लिए प्रशासन अब एक्शन मोड में है। ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू किया जा रहा है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को एक सख्त अल्टीमेटम दिया है। निगम को 31 अक्टूबर तक सड़कों, डिवाइडरों, फुटपाथों और खुले मैदानों से धूल, कचरा और निर्माण मलबे को पूरी तरह हटाना होगा। अगर समय सीमा तक काम पूरा नहीं हुआ, तो सख्त नियामक कार्रवाई की जाएगी।
प्रदूषण के स्रोतों की सटीक पहचान के लिए तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दिल्ली-NCR के लिए 'एयर पॉल्यूशन एनालिसिस' (AATAL) सुविधा का उद्घाटन किया है। यह फैसिलिटी वाहनों के उत्सर्जन, पराली जलाने और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल जैसे प्रदूषण के मुख्य कारणों का विस्तृत डेटा प्रदान करेगी, जिससे एजेंसियां टारगेटेड तरीके से काम कर सकेंगी।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक सकारात्मक पहलू साझा करते हुए बताया कि 24 अक्टूबर को दर्ज किया गया AQI पिछले एक दशक (कोविड-19 महामारी की अवधि को छोड़कर) का सबसे बेहतर आंकड़ा था। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि मामूली सुधार से संतुष्ट नहीं होना चाहिए। CPCB और SAMEER ऐप के आंकड़े बताते हैं कि हवा की गुणवत्ता में अभी भी उतार-चढ़ाव बना हुआ है, इसलिए सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है।