दिल्ली-NCR की हवा हुई खराब, GRAP स्टेज 1 लागू; मेट्रो फेरे बढ़े
दिल्ली-NCR में AQI बढ़ने से GRAP स्टेज 1 लागू किया गया है। प्रदूषण कम करने के लिए मेट्रो फेरे बढ़ाए गए और निर्माण कार्यों पर पाबंदी लगी है।

दिल्ली और नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में एक बार फिर प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 22 अक्टूबर 2026 को वायु गुणवत्ता 'खराब' से 'बहुत खराब' श्रेणी में दर्ज की गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने तुरंत प्रभाव से दिल्ली एनसीआर वायु गुणवत्ता को सुधारने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के स्टेज 1 उपायों को लागू कर दिया है।
हवा की गुणवत्ता में गिरावट अचानक देखी गई। 20 अक्टूबर को AQI 179 (मध्यम) था, जो 21 अक्टूबर को बढ़कर 245 तक पहुंच गया, जो पिछले 100 दिनों का सबसे उच्चतम स्तर है। दिल्ली के कुछ इलाकों में तो हालात और भी खराब रहे; जहांगीरपुरी में AQI 311, विवेक विहार में 307 और चांदनी चौक में 303 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है।
प्रदूषण रोकने के लिए सरकार ने कसी कमर
प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए दिल्ली सरकार और प्रशासन ने कई कड़े कदम उठाए हैं। अब सड़कों पर कचरा जलाने और फूड स्टॉल्स द्वारा कोयले या लकड़ियों के इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। लोगों को निजी वाहनों के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए प्रोत्साहित करने के लिए दिल्ली मेट्रो (DMRC) ने 22 अक्टूबर से कार्यदिवसों में 20 अतिरिक्त ट्रेन फेरे शुरू किए हैं।
सड़कों पर धूल कम करने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने मोर्चा संभाल लिया है। हाईवे पर 60 वॉटर स्प्रिंकलर, 14 एंटी-स्मॉग गन और 23 मैकेनिकल रोड स्वीपर तैनात किए गए हैं, जिनके साथ 900 से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं। NHAI सदस्य (तकनीकी) आलोक दीपंकर ने CAQM के नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
आने वाले समय में प्रतिबंध और भी कड़े होने वाले हैं। 1 नवंबर से 'नो PUCC, नो फ्यूल' नियम लागू होगा और बाहरी राज्यों की नॉन-BS-VI गाड़ियों (इलेक्ट्रिक और CNG को छोड़कर) के दिल्ली में प्रवेश पर 31 जनवरी तक रोक रहेगी। इसके अलावा, 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल उड़ाने वाले निर्माण कार्यों पर रोक रहेगी, जबकि 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण कार्यों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। ऑफिसों में भीड़ कम करने के लिए आधे कर्मचारियों को वर्क-फ्रॉम-होम और समय में बदलाव (staggered timings) का विकल्प दिया जाएगा।
पर्यावरण मंत्री मंजींदर सिंह सिरसा का कहना है कि पिछले सालों के मुकाबले GRAP स्टेज 1 लागू होने में देरी यह दिखाती है कि सरकार के निवारक उपाय काम कर रहे हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह प्रदूषण बच्चों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। गौरतलब है कि लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ की एक स्टडी के मुताबिक, 2009 से 2019 के बीच भारत में प्रदूषण के कारण करीब 38 लाख मौतें हुई थीं।