दशहरा उत्सव के बाद दिल्ली-NCR की हवा हुई जहरीली, AQI 'पुअर' श्रेणी में पहुंचा

Kittu Kumari21 October 20262 min read0 viewsNCR
दशहरा उत्सव के बाद दिल्ली-NCR की हवा हुई जहरीली, AQI 'पुअर' श्रेणी में पहुंचा

राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में एक बार फिर प्रदूषण का साया गहरा गया है। दशहरा उत्सव के बाद दिल्ली-NCR वायु गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे हवा की क्वालिटी 'पुअर' (खराब) श्रेणी में पहुंच गई है। जुलाई के मध्य के बाद यह पहला मौका है जब हवा की स्थिति इतनी चिंताजनक हुई है। बुधवार सुबह 7:05 बजे तक दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 227 दर्ज किया गया, जो मंगलवार शाम को 179 था। सुबह 10 बजे तक यह आंकड़ा और बढ़कर 238 हो गया।

शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थिति और भी गंभीर है। कई इलाके 'वेरी पुअर' श्रेणी में चले गए हैं। पूसा (IITM) में AQI 318, जहांगीरपुरी में 310, पंजाबी बाग में 304 और चांदनी चौक में 302 दर्ज किया गया। एनसीआर के अन्य शहरों की बात करें तो ग्रेटर नोएडा में AQI 315 रहा, जबकि नोएडा और गुरुग्राम में यह क्रमशः 203 और 205 के स्तर पर रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, 201 से 300 के बीच का AQI 'खराब' और 301 से 400 के बीच 'बहुत खराब' माना जाता है।

प्रदूषण बढ़ने की वजह और सरकार की तैयारी

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विशेषज्ञों का मानना है कि दशहरा के दौरान पुतले जलाने और पटाखों के इस्तेमाल से प्रदूषण में अचानक उछाल आया है। इसके साथ ही मौसम में बदलाव, हवा की धीमी गति और पंजाब-हरियाणा में शुरू हुई पराली जलाने की घटनाओं ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के अनुसार, 23 अक्टूबर तक हवा की गुणवत्ता इसी तरह खराब रहने की संभावना है।

बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार 1 नवंबर से अपना 'विंटर एक्शन प्लान' लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत 'नो PUC, नो फ्यूल' जैसी सख्त नीतियां और वाहनों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। वहीं, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) धूल नियंत्रण के लिए समीक्षा बैठकें कर रहा है और पराली जलाने की निगरानी के लिए पंजाब और हरियाणा में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए गए हैं।

प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) एक बड़ा कदम उठा रही है। समिति ने 104 करोड़ रुपये का एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसका लक्ष्य 40 चिन्हित हॉटस्पॉट्स पर PM10 और PM2.5 के स्तर को 20% तक कम करना है। इस प्रोजेक्ट के तहत निजी ठेकेदारों को प्रदूषण कम करने वाली तकनीक लगाने के लिए उनके प्रदर्शन के आधार पर भुगतान किया जाएगा।

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