दिल्ली-NCR की हवा हुई जहरीली, प्रदूषण हॉटस्पॉट्स की संख्या हुई दोगुनी
दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता बेहद खराब हो गई है। कई इलाकों में AQI 400 के पार गया, GRAP-II लागू और गुरुग्राम में वर्क फ्रॉम होम के आदेश।

राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में सांस लेना अब दूभर होता जा रहा है। दिल्ली-NCR वायु प्रदूषण ने एक बार फिर खतरनाक रूप ले लिया है, जिससे पिछले 288 दिनों का सबसे बुरा संकट खड़ा हो गया है। शहर का ओवरऑल एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 379 तक पहुंच गया है, जिसे 'बेहद खराब' श्रेणी में रखा गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि महज 24 घंटों के भीतर उन मॉनिटरिंग स्टेशनों की संख्या दोगुनी हो गई है जहां प्रदूषण का स्तर 'गंभीर' (400 से ऊपर) दर्ज किया गया। मंगलवार को ऐसे 11 स्टेशन थे, जो बुधवार तक बढ़कर 22 हो गए।
अगर इलाकों की बात करें तो IIT दिल्ली में AQI 458 तक जा पहुंचा है। वहीं जहांगीरपुरी और पंजाबी बाग में 448 और मुंडका में 439 का स्तर दर्ज किया गया है। इसके अलावा आईटीओ, द्वारका, रोहिणी, अलीपुर, बवाना और सोनिया विहार जैसे इलाकों की स्थिति भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है।
GRAP-II लागू, गुरुग्राम में वर्क फ्रॉम होम के निर्देश
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने स्थिति पर नजर रखी है। फिलहाल शहर में GRAP-II (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) लागू है, जिसके तहत सड़कों पर मैकेनिकल स्वीपिंग और पानी का छिड़काव तेज कर दिया गया है। साथ ही, 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक उन पेट्रोल और डीजल वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी है जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते। दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर जैसे मुख्य प्रवेश द्वारों पर पुलिस सख्ती से चेकिंग कर रही है।
गुरुग्राम प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए और भी कड़े कदम उठाए हैं। यहां 5 नवंबर से 20 नवंबर 2026 तक धूल उड़ाने वाले निर्माण और विध्वंस कार्यों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इतना ही नहीं, डिप्टी कमिश्नर ने आदेश दिया है कि सरकारी और निजी कार्यालयों में केवल 50% स्टाफ ही मौजूद रहेगा, जबकि बाकी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम करना होगा।
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, हवा की धीमी गति और गिरते तापमान के कारण प्रदूषक तत्व हवा में ही फंसे हुए हैं और बिखर नहीं पा रहे हैं। अब PM2.5 की जगह PM10 मुख्य प्रदूषक बन गया है। सैटेलाइट डेटा से पता चला है कि 4 नवंबर को पंजाब, मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में सैकड़ों पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं, जिसका असर दिल्ली-NCR की हवा पर साफ दिख रहा है। अनुमान है कि 6 और 7 नवंबर के बीच धुंध और साफ आसमान के कारण स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।