दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता खराब, सरकार ने उठाए बड़े कदम

Kittu Kumari26 August 20262 min read81 viewsDelhi Local
दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता खराब, सरकार ने उठाए बड़े कदम

बुधवार, 26 अगस्त 2026 को दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी के बीच दर्ज की गई। अधिकारियों द्वारा पर्यावरण नियमों को लगातार लागू किया जा रहा है। विभिन्न प्लेटफार्मों पर अलग-अलग एक्यूआई आंकड़े सामने आए, जिसमें एनडीटीवी ने दिल्ली का एक्यूआई 119 यानी खराब दर्ज किया, रिपब्लिक वर्ल्ड ने इसे 101 यानी मध्यम बताया और एक्यूवेदर ने इसे 95 यानी खराब सूची में रखा। स्थानीय डेटा के अनुसार, सोनिया विहार वाटर ट्रीटमेंट प्लांट डीजेबी में सबसे अधिक एक्यूआई 169 दर्ज किया गया, जबकि द्वारका सेक्टर 8 स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मलेरिया रिसर्च में सबसे कम 34 दर्ज हुआ। आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली का औसत एक्यूआई 84 रहा, जबकि आसपास के इलाकों में फरीदाबाद में 98, गुरुग्राम में 93, गाजियाबाद में 85, ग्रेटर नोएडा में 102 और नोएडा में 88 दर्ज किया गया। हवा में मुख्य प्रदूषक तत्व पीएम 2.5 और पीएम 10 बने हुए हैं। देश के अन्य हिस्सों में भी हवा की स्थिति अलग-अलग रही, जहां मुंबई में 28 से 67, जयपुर में 153, बेंगलुरु में 37 से 94, लखनऊ में 82 से 109 और चेन्नई में 52 से 99 एक्यूआई दर्ज किया गया।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। 500 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण स्थलों की निगरानी सरकार के धूल पोर्टल और एआई-सक्षम कैमरों के जरिए की जाएगी। इसके अलावा, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने निर्देश 102 को मंजूरी दी है, जिसके तहत स्वच्छ हल्के वाणिज्यिक वाहनों पर जोर दिया जाएगा। दिल्ली में 1 जनवरी 2027 से डीजल, पेट्रोल और सीएनजी एन1 श्रेणी के नए हल्के वाणिज्यिक वाहनों के पंजीकरण पर प्रतिबंध रहेगा, जिसके बाद 1 जुलाई 2027 से उच्च घनत्व वाले एनसीआर जिलों में भी यह लागू होगा। इसके अलावा निर्देश 103 के तहत स्टोन क्रशर यूनिट्स में वीडियो सर्विलांस और सेंसर तकनीक से धूल नियंत्रण को मजबूत किया गया है। एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उद्योगों के लिए संशोधित पार्टिकलेट मैटर उत्सर्जन मानकों का पालन करने की अंतिम तिथि 1 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई है (स्रोत: प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो)।

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा और मुख्यमंत्री गुप्ता ने प्रदूषण का समाधान कार्यक्रम को दोहराया। इस कार्यक्रम में कचरा प्रबंधन, औद्योगिक निरीक्षण और इलेक्ट्रिक वाहन नीतियों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम का लक्ष्य 2017 के स्तर की तुलना में 2026 तक 131 शहरों में पार्टिकलेट मैटर में 40 प्रतिशत की कमी लाना है। हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हवा में मौजूदा सुधार का मुख्य कारण मानसून का मौसम है, न कि कोई स्थायी समाधान, और उन्होंने यह भी नोट किया कि भारत का एक्यूआई ढांचा विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों की तुलना में अधिक नरम है।

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