दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर: अब सांसों के साथ प्रजनन स्वास्थ्य पर भी मंडराया खतरा

दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण से अब सांसों के साथ प्रजनन स्वास्थ्य और हार्मोनल संतुलन पर भी खतरा मंडरा रहा है। जानें एक्सपर्ट्स की चेतावनी।

Kittu Kumari31 October 20262 min read0 viewsNCR
दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर: अब सांसों के साथ प्रजनन स्वास्थ्य पर भी मंडराया खतरा

दिल्ली-NCR में जहरीली होती हवा अब केवल फेफड़ों और दिल तक सीमित नहीं रह गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक ऐसी चेतावनी जारी की है जिसने सबको चौंका दिया है। अब यह प्रदूषण सीधे तौर पर लोगों के प्रजनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) और हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक इस प्रदूषित हवा में रहने से गंभीर शारीरिक बदलाव आ रहे हैं।

जीटीबी अस्पताल के मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. अमितेश अग्रवाल ने आम जनता को आगाह करते हुए बताया है कि हवा में मौजूद खतरनाक कण पुरुषों में स्पर्म काउंट (Sperm Count) को कम कर सकते हैं। वहीं, महिलाओं में यह प्रदूषण हार्मोनल असंतुलन का कारण बन रहा है। केवल इतना ही नहीं, नए शोधों से यह भी संकेत मिले हैं कि प्रदूषण का सीधा संबंध मेटाबॉलिक जटिलताओं से है। वैज्ञानिक अब इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि बारीक कण (Fine Particulate Matter) इंसान की याददाश्त और दिमाग के काम करने की क्षमता को कैसे प्रभावित कर रहे हैं।

सावधानी और सरकारी पाबंदियां

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जैसे-जैसे नवंबर की शुरुआत हो रही है, वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के 'गंभीर' श्रेणी में पहुंचने की आशंका है। इसे देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने सख्त कदम उठाए हैं। धूल उड़ाने वाली निर्माण गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही, 5 नवंबर से 20 नवंबर तक वर्क-फ्रॉम-होम मॉडल अपनाने की सलाह दी गई है ताकि लोगों का बाहर निकलना कम हो सके।

आईटीआई जहांगीरपुरी जैसे इलाकों में PM2.5 का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य अधिकारियों ने मास्क के सही चुनाव पर जोर दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक:

  • N95, KN95 और FFP2 मास्क: ये सबसे प्रभावी हैं क्योंकि ये लगभग 95% बारीक कणों को रोकने में सक्षम हैं, बशर्ते इन्हें चेहरे पर सही तरीके से फिट किया गया हो।
  • सर्जिकल और कपड़े के मास्क: ये प्रदूषण से बचने के लिए बहुत सीमित सुरक्षा प्रदान करते हैं और उतने प्रभावी नहीं हैं।

डॉक्टरों ने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और हृदय या सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को सलाह दी है कि वे प्रदूषण के उच्च स्तर के दौरान बाहरी गतिविधियों और शारीरिक मेहनत वाले कामों से बचें।

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