दिल्ली-NCR में प्रदूषण रोकने के लिए सख्त पाबंदियां लागू, निर्माण कार्य बंद और वर्क फ्रॉम होम का आदेश
दिल्ली और NCR में वायु प्रदूषण को रोकने के लिए निर्माण कार्यों पर रोक और वर्क फ्रॉम होम जैसे कड़े कदम उठाए गए हैं। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों (NCR) में हर साल नवंबर के महीने में बिगड़ने वाली हवा की क्वालिटी को देखते हुए प्रशासन ने इस बार पहले ही कमर कस ली है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने प्रदूषण के स्तर को बढ़ने से रोकने के लिए कैलेंडर आधारित कुछ बेहद सख्त पाबंदियां लागू की हैं। ये कदम इसलिए उठाए गए हैं ताकि नवंबर के पहले पखवाड़े में होने वाले 'गंभीर' प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सके।
इन नए नियमों के मुताबिक, 5 नवंबर से 20 नवंबर तक धूल उड़ाने वाले सभी तरह के निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसमें हाईवे, फ्लाईओवर, सड़कों, टेलीकॉम और बिजली लाइनों जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं। इसके साथ ही, दिल्ली और NCR के पांच जिलों—गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर—के सरकारी और निजी दफ्तरों में अब केवल 50% कर्मचारी ही ऑफिस आ सकेंगे, जबकि बाकी लोगों को वर्क फ्रॉम होम करना होगा। हालांकि, अस्पताल, रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट और रक्षा एवं सुरक्षा से जुड़े जरूरी प्रोजेक्ट्स को इन नियमों से छूट दी गई है।
सर्दियों के एक्शन प्लान में गाड़ियों पर कड़े नियम
प्रशासन ने 1 नवंबर से 'दिल्ली विंटर एक्शन प्लान' की शुरुआत कर दी है। इसके तहत बाहरी राज्यों में रजिस्टर्ड वेहिकल्स, जो BS-VI मानक के अनुरूप नहीं हैं, उन्हें 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, इलेक्ट्रिक और CNG गाड़ियों को इससे राहत दी गई है। साथ ही, 'नो PUC, नो फ्यूल' नीति को सख्ती से लागू किया गया है, यानी बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के ईंधन नहीं मिलेगा। निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए दिल्ली मेट्रो को छोड़कर अन्य अधिकृत पार्किंग फीस को 28 फरवरी 2027 तक दोगुना कर दिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि 2018 से 2025 तक के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि नवंबर की शुरुआत में हवा की गुणवत्ता सबसे ज्यादा खराब होती है। धीमी हवा, पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना और 8 नवंबर को होने वाली दिवाली की वजह से प्रदूषण बढ़ने की पूरी आशंका है। खास बात यह है कि ये पाबंदियां GRAP की तरह AQI के आंकड़ों का इंतजार नहीं कर रही हैं, बल्कि समय से पहले ही लागू कर दी गई हैं ताकि प्रदूषण चरम पर पहुंचने से पहले ही उसे रोका जा सके।