दिल्ली-NCR में प्रदूषण के असली स्रोतों की पहचान करेगी नई लैब, जितेंद्र सिंह ने किया उद्घाटन
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दिल्ली-NCR में AATAL लैब का उद्घाटन किया, जो प्रदूषण के असली स्रोतों और स्वास्थ्य प्रभावों की पहचान करेगी।

दिल्ली-NCR में हर साल बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए अब सिर्फ AQI के आंकड़ों पर निर्भर नहीं रहा जाएगा, बल्कि प्रदूषण के सटीक कारणों और उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर की वैज्ञानिक जांच होगी। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को 'इंटीग्रेटेड एटमॉस्फेरिक केमिस्ट्री एंड एरोसोल टॉक्सिसिटी एनालिसिस लेबोरेटरी' (AATAL) का उद्घाटन किया। यह अपनी तरह की पहली ऐसी सुविधा है जो दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण की संरचना, उसके स्रोतों और संभावित स्वास्थ्य खतरों की पहचान करने के लिए बनाई गई है।
केंद्र सरकार के 'मिशन मौसम' के तहत स्थापित यह लैब आधुनिक उपकरणों से लैस है। अब तक हम केवल यह जानते थे कि प्रदूषण का स्तर 100 है या 200, लेकिन यह नई लैब यह बताएगी कि उस प्रदूषण में वास्तव में क्या मिला हुआ है और वह कहां से आ रहा है। उद्घाटन के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह सुविधा वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करेगी कि प्रदूषण में अलग-अलग स्रोतों का कितना योगदान है, जिससे प्रशासन केवल अनुमान लगाने के बजाय सबूतों के आधार पर ठोस कदम उठा सकेगा।
रियल-टाइम डेटा से होगा प्रदूषण पर प्रहार
AATAL लैब की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रियल-टाइम डेटा प्रदान करेगी। यह लैब वाहनों के धुएं, औद्योगिक गतिविधियों, पराली जलाने, निर्माण कार्यों और सड़कों की धूल के बीच अंतर कर सकेगी। यहां तक कि यह भी पता चलेगा कि पड़ोसी राज्यों से कितना प्रदूषण बहकर दिल्ली आ रहा है। एक प्रदर्शन के दौरान मंत्री ने देखा कि उस समय दिल्ली के कुल प्रदूषण स्तर (जो करीब 180 था) में ट्रांसपोर्ट का योगदान लगभग 25 प्रतिशत था।
यह लैब PM2.5, वायुमंडलीय गैसों और जहरीले तत्वों का विश्लेषण करेगी। साथ ही, इसे IITM के 'AIRWISE' सिस्टम से जोड़ा गया है, जो अगले 72 घंटों के लिए 400 मीटर के सटीक दायरे में वायु गुणवत्ता की भविष्यवाणी कर सकता है। इससे 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान' (GRAP) के तहत समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे।
प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. सचिन घुडे के अनुसार, यह सुविधा कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) और अन्य एजेंसियों को यह बताने में मदद करेगी कि कौन से प्रदूषण स्रोत सबसे ज्यादा प्रभावी हैं और उनके खिलाफ किए गए उपाय कितने सफल रहे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देकर कहा कि प्रदूषण जैसी बड़ी समस्या को कोई एक विभाग अकेले हल नहीं कर सकता; इसके लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा।