दिल्ली की इस कॉलोनी ने हासिल की बड़ी सफलता, कचरा प्रबंधन मॉडल पूरे शहर में होगा लागू

दक्षिण दिल्ली की नवजीवन विहार कॉलोनी ने कचरे के प्रबंधन में एक मिसाल कायम की है और 'जीरो-वेस्ट टू लैंडफिल' मॉडल को पूरी तरह से सफल बनाया है। इस पहल के तहत निवासी स्रोत पर ही गीले और सूखे कचरे को अलग करते हैं, जिसमें रसोई के कचरे को खाद में बदला जाता है और सूखे कचरे को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है। नवजीवन विहार रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) की सचिव डॉ. रुबी मखीजा के नेतृत्व में चलने वाले इस सामुदायिक अभियान में कचरा संग्रहण के लिए QR कोड-आधारित सिस्टम का उपयोग किया जाता है।
लैंडफिल से बचा 10 लाख किलो से ज्यादा कचरा
पिछले आठ वर्षों में, नवजीवन विहार ने कचरे के पृथक्करण, कंपोस्टिंग और रीसाइक्लिंग के जरिए 10 लाख किलोग्राम से अधिक कचरे को लैंडफिल में जाने से सफलतापूर्वक बचाया है। इस सफलता को देखते हुए, उपराज्यपाल तारणजीत सिंह संधू ने हाल ही में कॉलोनी का दौरा किया और MCD (Municipal Corporation of Delhi) अधिकारियों को इस मॉडल को पूरे शहर में, विशेष रूप से कम आय वाली और अनधिकृत कॉलोनियों में लागू करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए कॉर्पोरेट सोशल जिम्मेदारी फंड और समर्पित फंडिंग तंत्र का उपयोग करके एयरोबिन और RRR (Reduce, Reuse, Recycle) केंद्र जैसे बुनियादी ढांचे तैयार किए जाएं, जिसकी जानकारी ANI News रिपोर्ट में दी गई है। कॉलोनी के RRR सेंटर ने अकेले ही 65 टन से अधिक पुनः प्रयोज्य वस्तुओं (जैसे किताबें, खिलौने, कपड़े और ई-कचरा) को लैंडफिल में जाने से रोका है।
दिल्ली में बढ़ रहा है शून्य-कचरा क्षेत्रों का दायरा
यह कदम Solid Waste Management Rules, 2016 के तहत दिल्ली के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है। दिल्ली में वर्तमान में 670 से अधिक प्रमाणित शून्य-कचरा क्षेत्र हैं, जिनमें 590 से अधिक कॉलोनियां और 40 संस्थान शामिल हैं, जो रोजाना लगभग 100 टन कचरे को प्रोसेस और कंपोस्ट करते हैं। शहर ने पुराने कचरे के प्रबंधन में भी बड़ी प्रगति की है, जिसमें 21 मई 2026 तक तीन प्रमुख लैंडफिल साइटों ओखला, भलस्वा और गाजीपुर से 255 लाख मीट्रिक टन से अधिक पुराने कचरे को प्रोसेस करके लगभग 75 एकड़ जमीन को खाली कराया गया है। दिल्ली की दैनिक कचरा प्रसंस्करण क्षमता बढ़कर लगभग 20,000 मीट्रिक टन हो गई है। दिल्ली की मेयर प्रवेश वाही ने 9 जुलाई 2026 को घोषणा की थी कि ओखला और भलस्वा लैंडफिल साइटों को दिसंबर 2026 तक और गाजीपुर लैंडफिल को दिसंबर 2027 तक पूरी तरह से साफ किए जाने की उम्मीद है, जिसका विवरण Delhi Environment Department की वेबसाइट पर उपलब्ध है।