मुस्तफाबाद में वोटर लिस्ट से मुस्लिम नाम हटाने का आरोप, बीजेपी एजेंटों पर लगे गंभीर सवाल

दिल्ली के मुस्तफाबाद में बीजेपी एजेंटों पर मुस्लिम वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से कटवाने के गंभीर आरोप लगे हैं। जानें क्या है पूरा मामला।

Kittu Kumari30 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
मुस्तफाबाद में वोटर लिस्ट से मुस्लिम नाम हटाने का आरोप, बीजेपी एजेंटों पर लगे गंभीर सवाल

दिल्ली के मुस्तफाबाद निर्वाचन क्षेत्र में वोटर लिस्ट को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बूथ स्तर के एजेंटों ने सुनियोजित तरीके से जीवित मुस्लिम मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटवाने के लिए बड़े पैमाने पर आवेदन दिए हैं। यह पूरा मामला 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' प्रक्रिया के दौरान सामने आया है, जिसने आगामी चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दयालपुर इलाके के रहने वाले साजिद हुसैन, जो पिछले बीस सालों से वहीं रह रहे हैं, को तब झटका लगा जब उन्हें पता चला कि उनकी पत्नी अफसाना खातून और बेटे असद रजा जैदी के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए फॉर्म 7 भरा गया है। हैरानी की बात यह है कि इन आवेदनों में यह गलत दावा किया गया कि वे लोग या तो मर चुके हैं या स्थायी रूप से कहीं और चले गए हैं। साजिद का कहना है कि उन्होंने उस व्यक्ति को कभी देखा तक नहीं, जिसने यह आपत्ति दर्ज कराई है। रिकॉर्ड के मुताबिक, वह व्यक्ति बीजेपी का बूथ लेवल एजेंट चंद्र शेखर नैनवाल है।

आंकड़ों में दिख रही है संदिग्ध पैटर्न

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आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो मुस्तफाबाद में 31 अगस्त 2026 को ड्राफ्ट रोल जारी होने के बाद से कुल 843 आपत्तियां दर्ज की गई हैं। इनमें से 597 फॉर्म तीसरे पक्ष (third party) द्वारा भरे गए, जिनमें से 96 प्रतिशत आवेदनों का स्रोत बीजेपी के बूथ लेवल एजेंट थे। जांच में यह बात सामने आई है कि इन आवेदनों में से 572 सीधे तौर पर मुस्लिम मतदाताओं को निशाना बनाकर 24 अलग-अलग इलाकों में दाखिल किए गए थे।

नियमों के मुताबिक, एक व्यक्ति अधिकतम 10 फॉर्म 7 आवेदन दे सकता है, लेकिन आरोप है कि कम से कम दस एजेंटों ने इस सीमा को तोड़ते हुए 30 से अधिक फॉर्म भरे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दस्तावेजों के अनुसार, अक्टूबर के अंत में अकेले पोलिंग बूथ 129 में एक बीजेपी एजेंट ने 28 अलग-अलग आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि दयालपुर के 28 ऐसे मतदाता मिले जो अपने रजिस्टर्ड पते पर मौजूद थे, फिर भी उनके नाम हटाने की कोशिश की गई। इनमें से 19 लोगों के पास वैध पहचान पत्र हैं, लेकिन कानूनन जरूरी औपचारिक नोटिस किसी को नहीं मिला। हालांकि, चुनाव अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ फॉर्म भरने से नाम नहीं कटता; बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा जमीनी सत्यापन के बाद ही कोई नाम हटाया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन संदिग्ध आपत्तियों की सही जांच नहीं हुई, तो अंतिम वोटर लिस्ट (जो 22 दिसंबर 2026 को आएगी) में अल्पसंख्यक समुदाय का प्रतिनिधित्व काफी कम हो सकता है। इस अनियमितता के खिलाफ विपक्षी दल 1 नवंबर को दिल्ली में 'INDIA' गठबंधन की रैली के जरिए आवाज उठाने की तैयारी कर रहे हैं। फिलहाल, प्रभावित मतदाताओं के पास काउंटर क्लेम फाइल करने या अधिकारियों के सामने पेश होकर सत्यापन कराने का विकल्प है।

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