दिल्ली के MSMEs को बड़ा फायदा, GeM पोर्टल के जरिए सरकारी खरीद में 156% की भारी उछाल दर्ज!

दिल्ली के माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) को बड़ा लाभ मिला है। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के माध्यम से सरकारी खरीद में 156 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। राजधानी को सेवाओं की खरीद में बढ़ती भागीदारी के लिए 'सस्टेंड सर्विसेज प्रोक्योरमेंट अडॉप्शन' श्रेणी के तहत मान्यता दी गई है। यह विकास ऐसे समय में सामने आया है जब GeM ने हाल ही में 9 अगस्त 2026 को अपनी दसवीं वर्षगांठ मनाई है, जो डिजिटल सरकारी खरीद के लिए इसके मुख्य आधार की भूमिका को मजबूत करती है।
* दिल्ली के MSMEs की सरकारी खरीद में 156% की जोरदार उछाल।
* सेवाओं की खरीद में भागीदारी के लिए दिल्ली को 'सस्टेंड सर्विसेज प्रोक्योरमेंट अडॉप्शन' श्रेणी में मान्यता।
* GeM पोर्टल की स्थापना के एक दशक पूरे, ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) बढ़कर ₹1.55 लाख करोड़ से अधिक हुई।
* प्लेटफॉर्म पर 12.28 लाख से ज्यादा माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज (MSEs) शामिल।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के आंकड़े
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 10 अगस्त 2026 को बताया कि GeM की ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) एक दशक पहले के 422 करोड़ रुपये से बढ़कर ₹1.55 लाख करोड़ से अधिक हो गई है। यह पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी डिजिटल सरकारी खरीद के लिए एक मजबूत नींव स्थापित करती है। यह प्लेटफॉर्म अब 12.28 लाख से अधिक माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज (MSEs) की मेजबानी करता है, जिसमें 2.25 लाख से अधिक महिला-नेतृत्व वाली इकाइयां और 42,000 से ज्यादा स्टार्टअप शामिल हैं (Source)। अगस्त 2016 में अपनी शुरुआत के बाद से, GeM का संचयी GMV ₹20 लाख करोड़ को पार कर गया है, जो महत्वपूर्ण वृद्धि को दर्शाता है।
MSMEs और स्टार्टअप्स को मिले ऑर्डर्स की जानकारी
GeM के CEO मिहिर कुमार ने प्रकाश डाला कि प्लेटफॉर्म पर 45% सार्वजनिक खरीद ऑर्डर MSMEs को दिए जाते हैं, जो अनिवार्य 25% की आवश्यकता से अधिक हैं। कुल मिलाकर, रजिस्टर्ड MSMEs ने ₹9.07 लाख करोड़ से अधिक मूल्य के ऑर्डर सुरक्षित किए हैं। विशेष रूप से, 2.24 लाख से अधिक महिला-नेतृत्व वाले MSMEs ने ₹99,147 करोड़ से अधिक के ऑर्डर पूरे किए हैं, जबकि 42,242 से अधिक स्टार्टअप्स को ₹65,633 करोड़ से अधिक के ऑर्डर मिले हैं। SC/ST उद्यमों द्वारा खरीद भी ₹6,000 करोड़ को पार कर गई है, जिसमें लगभग 28% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। GeM की भविष्य की पहल निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, गड़बड़ियों का पता लगाने और एक सरल, तेज और अधिक पारदर्शी खरीद पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए डेटा-संचालित तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का लाभ उठाने पर केंद्रित हैं, जो 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण के साथ संरेखित है। IIT दिल्ली के एक अध्ययन का अनुमान है कि प्लेटफॉर्म ने ₹1.76 लाख करोड़ की शुद्ध सामाजिक बचत उत्पन्न की है।