दिल्ली की हवा हुई जहरीली: 3 साल में अक्टूबर की सबसे प्रदूषित शुरुआत, प्रशासन अलर्ट

राजधानी दिल्ली के लिए अक्टूबर का महीना एक बार फिर सेहत की चुनौती लेकर आया है। मानसून की विदाई के साथ ही शहर की हवा में जहर घुलने लगा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली ने पिछले तीन वर्षों में अक्टूबर के पहले हफ्ते में अब तक का सबसे खराब प्रदूषण स्तर दर्ज किया है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के विश्लेषण के अनुसार, अक्टूबर के पहले सात दिनों का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 171 रहा, जो हवा की गिरती गुणवत्ता की ओर इशारा करता है।
हवा की यह बदहाली केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी राज्यों में जलती पराली भी इसका एक बड़ा कारण बन रही है। इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट (IARI) के मुताबिक, बुधवार को पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में पराली जलाने की दर्जनों घटनाएं सामने आई हैं, जिसका सीधा असर दिल्ली की हवा पर पड़ रहा है।
प्रदूषण रोकने के लिए GRAP लागू, बिना PUC वाली गाड़ियों पर लगेगा जुर्माना
बिगड़ते हालात को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 1 अक्टूबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक के लिए एक संशोधित ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) लागू कर दिया है। इस बार की रणनीति यह है कि प्रदूषण बढ़ने का इंतजार करने के बजाय मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर ही पाबंदियां लगाई जाएंगी।
प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है और 1 अक्टूबर से ही उन वाहनों पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा रहा है जिनके पास वैध PUC सर्टिफिकेट नहीं है। आने वाले दिनों में पाबंदियां और कड़ी होने वाली हैं:
- 1 नवंबर से: अन्य राज्यों से आने वाले गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर रोक लगेगी।
- 11 नवंबर से: केवल CNG, इलेक्ट्रिक और BS-VI बसों को ही दिल्ली में आने की अनुमति होगी।
- दिसंबर-जनवरी: 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक रहेगी, जबकि धूल उड़ाने वाली गतिविधियों पर 31 जनवरी तक पाबंदी रहेगी।
- अन्य कदम: दफ्तरों में 50 प्रतिशत वर्क-फ्रॉम-होम लागू किया जा सकता है और पार्किंग शुल्क में बढ़ोतरी की जा सकती है।
सरकार ने 15 अक्टूबर तक शहर के 47 चिन्हित हॉटस्पॉट्स पर प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, भविष्य के लिए एक बड़ा फैसला लेते हुए यह तय किया गया है कि 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का ही रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पड़ोसी जिलों से अधूरे डेटा और पुराने उत्सर्जन रिकॉर्ड के कारण सटीक पूर्वानुमान लगाना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।