प्रदूषण नियंत्रण नियमों की अनदेखी पर सख्त हुए मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा, NDMC संस्थानों को दी चेतावनी

सर्दियों की दस्तक से पहले दिल्ली की हवा को साफ रखने के लिए सरकार ने अपनी कमर कस ली है। इसी कड़ी में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को NDMC इलाके का दौरा किया। मंत्री ने यहां एंटी-स्मॉग गन और वॉटर मिस्ट सिस्टम की कार्यप्रणाली का निरीक्षण किया और साफ तौर पर चेतावनी दी कि यदि कोई भी व्यावसायिक, संस्थागत या हॉस्पिटैलिटी संस्थान पर्यावरण मानकों को पूरा करने में विफल रहा, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बड़ी इमारतों के लिए अनिवार्य हैं एंटी-स्मॉग सिस्टम
दिल्ली सरकार और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, जिन इमारतों में ग्राउंड प्लस पांच मंजिलें (G+5) हैं और जिनका कुल निर्मित क्षेत्र 3,000 वर्ग मीटर से अधिक है, उनके लिए एंटी-स्मॉग गन या मिस्ट सिस्टम लगाना अनिवार्य है। इन प्रणालियों को 15 अगस्त तक स्थापित किया जाना था। नियमों के अनुसार, धूल के कणों को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए 5 से 20 माइक्रोन के अपर्चर वाले नोजल का उपयोग किया जाना चाहिए। अधिकारियों ने सलाह दी है कि प्रदूषण के चरम समय के दौरान इन मशीनों को बीच-बीच में चलाया जाए ताकि उनकी दक्षता बनी रहे।
मंत्री सिरसा ने बताया कि प्रशासन प्रदूषण से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति पर काम कर रहा है। 1 अक्टूबर से 60 कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन, 334 प्रवर्तन टीमें और एक एआई-संचालित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पूरी तरह सक्रिय हैं। सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 2,200 से अधिक गैर-अनुपालन वाले औद्योगिक इकाइयों को सील किया जा चुका है।
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता खुद स्थिति पर नजर रख रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और मलबे के प्रबंधन को लेकर किसी भी एजेंसी को जवाबदेही से छूट नहीं मिलेगी। इसके अलावा, 1 नवंबर से गैर-BS-VI वाहनों पर लागू होने वाले प्रतिबंधों से पहले सरकार ने जनता से अपने प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) अपडेट रखने की अपील की है।