NDMC इलाके में प्रदूषण नियंत्रण उपायों का जायजा लेने पहुंचे मंत्री सिरसा, दी सख्त चेतावनी

सर्दियों की दस्तक के साथ ही दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार ने अपनी कमर कस ली है। इसी कड़ी में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने सोमवार को NDMC क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने एंटी-स्मॉग गन और वॉटर मिस्ट सिस्टम की कार्यक्षमता की जांच की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निर्माण स्थलों और व्यावसायिक इमारतों पर रहेगी पैनी नजर
मंत्री सिरsa ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि सभी होटल, व्यावसायिक इमारतें और निर्माण स्थल निर्धारित प्रदूषण नियमों का पालन कर रहे हैं। दिल्ली सरकार और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, जिन व्यावसायिक और संस्थागत इमारतों में ग्राउंड प्लस पांच (G+5) मंजिलें हैं और जिनका निर्मित क्षेत्र 3,000 वर्ग मीटर से अधिक है, वहां प्रदूषण नियंत्रण सिस्टम होना अनिवार्य है। मंत्री ने चेतावनी दी कि जो संस्थान इन नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निर्माण कार्यों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि साइट्स पर धूल को नियंत्रित करना और मलबे (C&D waste) का सही प्रबंधन करना बेहद जरूरी है। यदि निर्माण या तोड़फोड़ के दौरान नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित एजेंसियों पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।
प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार ने कई कड़े कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- वाहनों पर पाबंदी: 1 नवंबर से BS-VI उत्सर्जन मानक से कम वाले वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर प्रतिबंध लगेगा।
- निगरानी तंत्र: 1 अक्टूबर से AI-संचालित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, 60 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन और 334 प्रवर्तन टीमें चौबीसों घंटे निगरानी कर रही हैं।
- औद्योगिक कार्रवाई: अब तक नियमों का पालन न करने वाली 2,200 से अधिक प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों को सील किया जा चुका है।
- विंटर एक्शन प्लान: पार्किंग शुल्क को दोगुना करने और 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम (WFH) के प्रावधान जैसे कदम उठाए गए हैं।
मंत्री ने वाहन मालिकों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें और अपने प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) को अपडेट रखें ताकि शहर की हवा को साफ रखने में मदद मिल सके।