CJP विरोध प्रदर्शन का असर: दिल्ली के 45 मेट्रो स्टेशनों के गेट रात 10 बजे तक बंद

राजधानी दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बड़े विरोध प्रदर्शन के चलते आम जनता की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुरक्षा कारणों के चलते दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को 45 मेट्रो स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट्स को रात 10 बजे तक बंद रखने का फैसला किया है। दरअसल, शुक्रवार रात 9 बजे से ही ये पाबंदियां लागू कर दी गई थीं, जिन्हें दिल्ली पुलिस के अनुरोध और भारी भीड़ को देखते हुए अब आगे बढ़ा दिया गया है।
मेट्रो प्रशासन ने साफ किया है कि प्रभावित स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा चालू रहेगी, लेकिन नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। यह पूरा घटनाक्रम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर हो रहे प्रदर्शन से जुड़ा है। इस आंदोलन को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), AISF, विभिन्न किसान संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन मिल रहा है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और बड़े नेताओं की हिरासत
जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति न मिलने और नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने के बाद माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। शहर की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) समेत 25,000 से अधिक जवान तैनात किए गए हैं। पुलिस ने अब तक बड़ी कार्रवाई करते हुए शनिवार को 3,000 और पिछली रात करीब 1,000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है।
हिरासत में लिए गए लोगों में CJP के संस्थापक अभिजीत डिपके, सौरव दास, आशुतोष रंका, कानूनी टीम की प्रमुख रत्ना सिंह और मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी शामिल हैं। इतना ही नहीं, प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश कर रहे पूर्व मुख्यमंत्रियों जैसे ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, पिनाराई विजयन और माणिक सरकार को भी हिरासत में लिया गया। वहीं, राहुल गांधी ने भी प्रदर्शनकारियों के प्रति अपना समर्थन जताया है।
सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने जनपथ-कर्तव्य पथ क्रॉसिंग के 4 किलोमीटर के दायरे में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं और शराब की दुकानों को भी बंद रखा गया है। इसके अलावा, भारतीय रेलवे ने नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन स्टेशनों के बीच चलने वाली 250 से अधिक मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द कर दिया है।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने परिवहन पर लगी इन व्यापक पाबंदियों पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सुरक्षा उपाय आनुपातिक होने चाहिए और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए। दूसरी ओर, दिल्ली की एक अदालत ने रत्ना सिंह द्वारा पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की याचिका को खारिज कर दिया है।