प्रदूषण से जंग: दिल्ली मेट्रो बढ़ाएगी फेरे, निर्माण स्थलों पर होगी कड़ी निगरानी

दिल्ली-NCR में हवा की गिरती गुणवत्ता और GRAP-1 (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) लागू होने के बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने प्रदूषण से निपटने के लिए कमर कस ली है। शहर में बढ़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए DMRC अब लोगों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करेगा। इसके लिए मंगलवार से कार्यदिवसों (सोमवार से शुक्रवार) के दौरान मेट्रो नेटवर्क पर 20 अतिरिक्त ट्रिप संचालित किए जाएंगे।
हवा में बढ़ते धूल के कणों और प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली मेट्रो अपने निर्माण स्थलों और आसपास के इलाकों में एंटी-पॉल्यूशन ड्राइव तेज कर रही है। DMRC के इंजीनियर अब निर्माण स्थलों की बारीकी से जांच करेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सारा निर्माण मटेरियल सही तरीके से ढका गया है और बाहर निकलने वाले वाहनों के लिए 'व्हील वॉश' की सुविधा चालू है।
धूल और कचरे को हटाने के लिए विशेष अभियान
प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मेट्रो प्रशासन केवल ट्रेनों के फेरे ही नहीं बढ़ा रहा, बल्कि जमीनी स्तर पर भी कई कदम उठा रहा है। इसके तहत निर्माण स्थलों के भीतर धूल के स्तर को कम करने, आसपास की सड़कों से धूल हटाने और फुटपाथ व रोड डिवाइडर से कचरा साफ करने जैसे विशेष कार्य किए जाएंगे।
DMRC ने बताया कि वर्तमान में शहर की लगभग 31 किलोमीटर सड़कें उनके अस्थायी अधिकार क्षेत्र में हैं, जिन्हें मेट्रो निर्माण के लिए लिया गया है। इनमें से अधिकांश सड़कों की मरम्मत की जा चुकी है ताकि वे प्रदूषण का कारण न बनें। इसके अलावा, धूल को नियंत्रित करने के लिए निर्माण स्थलों, स्टेशनों और कार्यालयों में 250 से ज्यादा एंटी-स्मॉग और मिस्ट गन लगाई गई हैं।
यह पूरी कवायद इसलिए की जा रही है क्योंकि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-NCR में GRAP का पहला चरण लागू कर दिया है। दिल्ली का AQI 'खराब' श्रेणी में पहुंच गया है और आने वाले दिनों में भी इसके इसी स्तर पर रहने का अनुमान है। DMRC का पर्यावरण विभाग रोजाना निरीक्षण कर रहा है ताकि सभी पर्यावरणीय मानदंडों का सख्ती से पालन हो सके।