प्रदूषण पर लगाम: दिल्ली मेट्रो ने धूल नियंत्रण के लिए शुरू की स्पेशल ड्राइव

राजधानी में बढ़ते प्रदूषण और सख्त सरकारी निरीक्षणों के बीच दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया है। दिल्ली मेट्रो अब निर्माण स्थलों पर धूल को नियंत्रित करने के लिए कड़े नियमों का पालन कर रही है, ताकि सड़कों पर धूल न फैले और हवा की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
दरअसल, यह कदम 9 अक्टूबर 2026 को दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) द्वारा किए गए निरीक्षणों के बाद उठाया गया है। इस जांच के दौरान DMRC सहित दिल्ली जल बोर्ड, NHAI और NBCC जैसी संस्थाओं में धूल नियंत्रण के उपायों में कमी पाई गई थी, जिसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। विशेष रूप से सेंट्रल सचिवालय मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 3 के पास सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट साइट पर खामियां देखी गई थीं।
प्रदूषण रोकने के लिए मेट्रो ने अपनाए ये कड़े उपाय
दिल्ली सरकार द्वारा 1 अक्टूबर 2026 को शुरू किए गए 'विंटर पॉल्यूशन एक्शन प्लान' के तहत DMRC ने अब एक विशेष अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत निम्नलिखित नियमों का सख्ती से पालन किया जा रहा है:
- निर्माण स्थलों पर 100 GSM के हरे रंग के एंटी-स्मॉग नेट का अनिवार्य उपयोग।
- धूल को दबाने के लिए नोजल-आधारित मिस्ट सिस्टम (Mist Systems) का संचालन।
- निर्माण सामग्री और मलबे को ले जाने वाले वाहनों को पूरी तरह ढककर रखना।
- सड़कों पर धूल न जाए, इसके लिए वाहनों के पहियों की नियमित धुलाई।
इसके अलावा, CAQM के नए निर्देशों के अनुसार, 500 वर्ग मीटर से अधिक के निर्माण स्थलों के लिए अब एक समर्पित वेब पोर्टल पर पंजीकरण करना अनिवार्य है, ताकि धूल नियंत्रण की निगरानी की जा सके। साथ ही, अब साइट्स पर PM10 और PM2.5 के स्तर को रियल-टाइम में प्रदर्शित करने का दबाव बढ़ गया है।
पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने स्पष्ट किया है कि DPCC नियमित रूप से फील्ड निरीक्षण जारी रखेगी और सरकारी एजेंसियों को भी निजी ठेकेदारों की तरह ही जवाबदेह ठहराया जाएगा। वहीं, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जोर देकर कहा कि विकास प्राथमिकता है, लेकिन किसी भी प्रोजेक्ट को पर्यावरण नियमों से छूट नहीं मिलेगी। बुनियादी ढांचे का विकास हवा की गुणवत्ता की कीमत पर नहीं होना चाहिए।