दिल्ली मेट्रो मौत मामला: आरोपी पूर्व IAS अधिकारी का पुराना रिकॉर्ड आया सामने, भ्रष्टाचार में रह चुके हैं जेल

Kittu Kumari13 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली मेट्रो मौत मामला: आरोपी पूर्व IAS अधिकारी का पुराना रिकॉर्ड आया सामने, भ्रष्टाचार में रह चुके हैं जेल

दिल्ली मेट्रो में सीट को लेकर हुए विवाद में एक व्यक्ति की मौत का मामला अब और गहराता जा रहा है। इस मामले में आरोपी पूर्व IAS अधिकारी संजय प्रताप सिंह और उनके बेटे सिद्धार्थ सिंह को अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, पूर्व अधिकारी का पुराना इतिहास सामने आया है, जिससे पता चलता है कि वह पहले भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिरे रहे हैं।

यह पूरी घटना 8 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 5:47 बजे की है, जब सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन के पास एक ट्रेन के अंदर विवाद शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि विवाद वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरक्षित सीट को लेकर हुआ था, जिसमें 48 वर्षीय पवन शर्मा और उनकी 65 वर्षीय मां दुर्गा देवी शामिल थे। आरोप है कि इस बहस के दौरान संजय प्रताप सिंह और उनके बेटे ने पवन शर्मा के साथ मारपीट की, उन्हें थप्पड़ मारे और धक्का दिया। इस हाथापाई में पवन शर्मा के सिर पर गंभीर चोट आई और जब उन्हें लोक नायक जय प्रकाश (LNJP) अस्पताल ले जाया गया, तो उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

भ्रष्टाचार के मामलों में पहले भी हो चुके हैं गिरफ्तार

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दिल्ली मेट्रो पुलिस ने इस मामले में 9 अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) और 3(5) (साझा इरादा) के तहत एफआईआर दर्ज की है। वहीं, अब जांच के दौरान यह खुलासा हुआ है कि 1984 बैच के पूर्व IAS अधिकारी संजय प्रताप सिंह का कानूनी रिकॉर्ड काफी विवादित रहा है।

  • 2015 का मामला: दिसंबर 2015 में सीबीआई (CBI) ने उन्हें 2.2 लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस दौरान उनके बैंक लॉकर की तलाशी ली गई थी, जिसमें से 31 सोने की ईंटें और भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी।
  • 1991 का मामला: इससे भी पहले, 1991 में जब वह दमन के कलेक्टर थे, तब भी उन्हें भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था।

हालांकि, पुलिस का कहना है कि भ्रष्टाचार के ये पुराने मामले वर्तमान हत्या की जांच से अलग हैं, लेकिन आरोपी की पृष्ठभूमि ने इस मामले में चर्चा बढ़ा दी है। DMRC अधिकारियों ने पुष्टि की है कि घटना के समय आरोपियों को ट्रेन से उतारा गया था और उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया गया था। फिलहाल, पिता-पुत्र जेल में हैं और पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है।

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