दिल्ली मेट्रो निर्माण कार्य की वजह से पिछले 15 सालों से दो लाख से ज्यादा किताबें बक्से और स्टोरेज कंटेनर में बंद पड़ी हैं। इस स्थिति ने राजधानी में बुनियादी ढांचे के विकास से प्रभावित होने वाली सांस्कृतिक संपत्तियों के संरक्षण और पहुंच को लेकर चल रही गंभीर चुनौतियों को उजागर किया है।
इस विशेष संग्रह के अलावा साहित्यिक अभिलेखागार के लिए जगह को लेकर अन्य चिंताएं भी बनी हुई हैं। 30 सितंबर 2026 तक की अलग-अलग रिपोर्टों में यह बात सामने आई है कि नई सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना के तहत 8.5 लाख किताबों वाले 135 साल पुराने पुस्तकालय को जगह की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि सेंट्रल विस्टा का मामला एक अलग संग्रह और परियोजना से जुड़ा हुआ है, लेकिन यह दिल्ली में बड़े पैमाने पर शहरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और ऐतिहासिक साहित्यिक संस्थानों के संरक्षण के बीच बार-बार पैदा होने वाले तनाव को साफ तौर पर दर्शाता है।