प्रदूषण से जंग: दिल्ली मेट्रो ने बढ़ाईं ट्रेनें, निजी वाहनों को छोड़ पब्लिक ट्रांसपोर्ट की ओर बढ़े लोग
GRAP के लागू होने और निजी वाहनों पर पाबंदी के बाद दिल्ली मेट्रो में बढ़ी भीड़, DMRC ने यात्रियों के लिए शुरू की अतिरिक्त ट्रेनें।

राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के 'बेहद खराब' स्तर पर पहुँचने के बाद अब लोगों का रुझान निजी वाहनों से हटकर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की ओर बढ़ा है। इस बढ़ती भीड़ को देखते हुए दिल्ली मेट्रो ने अपनी सेवाओं में बड़ा इजाफा किया है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने यात्रियों की सुविधा के लिए नेटवर्क क्षमता बढ़ाई है ताकि लोगों को सफर में परेशानी न हो।
दरअसल, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा 2 नवंबर 2026 को GRAP के दूसरे चरण (Stage II) को लागू करने के बाद शहर में वाहनों के इस्तेमाल पर सख्ती बढ़ गई है। इसी के जवाब में DMRC ने 3 नवंबर 2026 से कार्यदिवसों (weekdays) पर 20 अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप शुरू की हैं। अगर पहले से किए गए विस्तारों को भी जोड़ लिया जाए, तो अब नेटवर्क पर कुल 40 अतिरिक्त दैनिक यात्राएं उपलब्ध हैं।
प्रदूषण नियंत्रण के कड़े नियमों का असर
मेट्रो में यात्रियों की संख्या बढ़ने की एक बड़ी वजह 1 नवंबर 2026 से लागू हुए कड़े वाहन नियम हैं। अब गैर-BS-VI, गैर-CNG और गैर-इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन पर पाबंदी लगाई गई है। इसके साथ ही, नगर निकायों ने पार्किंग शुल्क को दोगुना कर दिया है, जिससे लोग निजी गाड़ियों के बजाय मेट्रो को प्राथमिकता दे रहे हैं। साथ ही, सरकारी और निजी कार्यालयों में 31 जनवरी 2027 तक 50 प्रतिशत वर्क-फ्रॉम-होम की नीति भी लागू है।
हालांकि अभी यात्रियों की संख्या काफी ज्यादा है, लेकिन DMRC के मुताबिक अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड 8 अगस्त 2025 को बना था, जब एक ही दिन में 81 लाख यात्रियों ने सफर किया था। प्रशासन को उम्मीद है कि प्रदूषण कम करने के लिए उठाए गए ये कदम और मेट्रो की बढ़ी हुई सेवाएं सड़कों पर वाहनों के दबाव और उत्सर्जन को कम करने में मददगार साबित होंगी।