दिल्ली में यूनिफॉर्म लेजिस्लेटिव रूल्स पर हाई-लेवल मीटिंग, कई राज्यों के स्पीकर होंगे शामिल

दिल्ली में 27 अक्टूबर को देश की विधानसभाओं के लिए यूनिफॉर्म लेजिस्लेटिव रूल्स पर अहम बैठक होगी, जिसमें कई राज्यों के स्पीकर शामिल होंगे।

Kittu Kumari25 October 20262 min read0 viewsNational
दिल्ली में यूनिफॉर्म लेजिस्लेटिव रूल्स पर हाई-लेवल मीटिंग, कई राज्यों के स्पीकर होंगे शामिल

देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी और एकसमान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। इसी मकसद से 27 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया जाएगा। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पूरे भारत की विधायी संस्थाओं (Legislative Bodies) के लिए नियमों की प्रक्रिया और कामकाज का एक 'यूनिफॉर्म मॉडल' तैयार करना है।

यह महत्वपूर्ण बैठक नई दिल्ली के सरदार पटेल मार्ग स्थित ताज होटल में होगी। इस पूरी चर्चा की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना करेंगे। वहीं, आयोजन समिति के सदस्य और दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता स्वागत भाषण देंगे। दरअसल, यह बैठक लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित 'कमिटी ऑफ प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स' के आह्वान पर बुलाई गई है, जिसमें प्रस्तावित यूनिफॉर्म मॉडल नियमों की ड्राफ्ट रिपोर्ट की बारीकी से समीक्षा की जाएगी।

विधायी प्रक्रियाओं में एकरूपता लाने की कोशिश

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इस पहल का मुख्य लक्ष्य देश भर की विधानसभाओं में प्रक्रियाओं में निरंतरता लाना और एक-दूसरे के बेहतरीन अनुभवों (Best Practices) को साझा करना है, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं की दक्षता में सुधार हो सके। बैठक में उत्तर प्रदेश, नागालैंड, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और दिल्ली की विधानसभाओं के अध्यक्ष और प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इसमें महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नारवेकर, हिमाचल प्रदेश के स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया और कर्नाटक के स्पीकर गुरुपड़गौड़ा संगनगौड़ा पाटिल जैसे दिग्गज शामिल होंगे।

दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने सभी आने वाले प्रतिनिधियों के लिए 'स्टेट गेस्ट' का दर्जा दिया है और उनके ठहरने व अन्य इंतजाम किए हैं। स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने इस सत्र को विधायी निकायों के बीच सहयोग और समन्वय को मजबूत करने का एक सुनहरा अवसर बताया है।

वहीं, उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने स्पष्ट किया कि यह समिति राज्यों के स्पीकर्स से अंतिम सुझाव जुटाएगी और उसके बाद एक विस्तृत रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर को सौंपी जाएगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि कोशिश यह नहीं है कि जबरन कोई 'वन-साइज-फिट्स-ऑल' (सबके लिए एक जैसा) फॉर्मूला थोपा जाए, बल्कि मकसद विधायी कार्यवाहियों को सरल और सुव्यवस्थित बनाना है।

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