Delhi-Meerut Expressway पर हादसों के बाद पूरी तरह पाबंदी, फिर भी दौड़ रहीं बाइक्स

कंवड़ यात्रा शुरू होने के बाद से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (DME) पर सात कंवड़ यात्रियों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं। ताजा हादसा बुधवार, 5 अगस्त 2026 को गाजियाबाद के भोजपुर इलाके में कलछिना गांव के पास हुआ, जहां एक अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने मोटरसाइकिल पर सवार तीन कंवड़ यात्रियों को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। ये सभी यात्री हरियाणा के झज्जर से हरिद्वार जा रहे थे। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और अज्ञात चालक के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है।
गाजियाबाद प्रशासन का कड़ा फैसला और रूट डायवर्जन
यात्रियों की बढ़ती संख्या और सड़क सुरक्षा के मुद्दों को देखते हुए, गाजियाबाद जिला प्रशासन और पुलिस ने शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 से गाजियाबाद में DME को आम वाहनों के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया है। मेरठ से आने वाली लेन को अब विशेष रूप से 'डाक कंवड़' के लिए आरक्षित किया गया है, जबकि सभी पैदल यात्रियों और अन्य बाइक सवार कंवड़ यात्रियों को तय किए गए वैकल्पिक मार्गों पर भेजा जा रहा है। हालांकि, इन कड़े प्रतिबंधों के बावजूद, एक्सप्रेसवे पर अभी भी मोटरसाइकिलें देखी जा रही हैं, जो नियमों के पालन में आ रही दिक्कतों को दिखाता है।
DCP ट्रैफिक ने दी जानकारी और आगामी सुरक्षा योजनाएं
DCP ट्रैफिक त्रिगुण बसेन ने पुष्टि की कि शुक्रवार सुबह 8 बजे से DME पर सभी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। वाहन चालकों को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE), दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और NH-9 जैसे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। वाहनों को डासना इंटरचेंज से NH-9 के जरिए हापुड़ की तरफ डायवर्ट किया जा रहा है। DME का उत्तर प्रदेश वाला हिस्सा 12 अगस्त को शिवरात्रि तक पांच दिनों के लिए पूरी तरह बंद रहेगा। भविष्य को देखते हुए, आईआईटी रुड़की और सीआरआरआई (CRRI) के वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर 15 अगस्त से DME पर देश की पहली 'वेरिएबल स्पीड लिमिट' प्रणाली लागू करने की योजना है, जिसका उद्देश्य भविष्य में सड़क सुरक्षा को बढ़ाना है।